चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)
Chanakya Niti Darpan Hindi
आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा
स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 65, कुल 132 में से
संदर्भ में पढ़ेंचाणक्यनीतिदर्पणः ६३
गन्धः सुवर्णे फलमिक्षुदण्डे—
नाऽकारि पुष्पं खलु चन्दनस्य ।
विद्वान् धनी भूपतिदीर्घजीवी
धातुः पुरा कोऽपि न बुद्धिदोऽभूत ॥३॥
दोहा—गन्ध सोन फल इक्षु धन, बुध चिरायु नरनाह ।
सुमन मलय धाता न किय, काहु ज्ञान गुरुनाह ॥३॥
सोने में सुगंध, ऊँख में फल, चन्दन में फूल, धनी विद्वान् और दीर्घजीवी राजा को विधाता ने बनाया ही नहीं। क्या किसी ने उन्हें सलाह भी नहीं दी ? ॥३॥
सर्वौषधीनाममृतं प्रधानम्
सर्वेषु सौख्येष्वशनं प्रधानम् ।
सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानं
सर्वेषु गात्रेषु शिरः प्रधानम् ॥४॥
दोहा—गुरच औषधि सुखन में, भोजन कहो प्रमान ।
चक्षु इन्द्रिय अंग में, शिर प्रधान भी जान ॥४॥
सब औषधियों में अमृत (गुरच = गिलोय) प्रधान है, सब सुखों में भोजन प्रधान है, सब इन्द्रियों में नेत्र प्रधान है और सब अंगों में मस्तक प्रधान है ॥४॥
दूतो न सञ्चरति खे न चलेच्च वार्त्ता ।
पूर्वं न जल्पितमिदं न च सङ्गमोऽस्ति ।
व्योम्नि स्थितं रविशशिग्रहणं प्रशस्तं