भारतकोश
चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

चाणक्य नीति दर्पण (भाषा टीका सहित)

Chanakya Niti Darpan Hindi

आचार्य चाणक्य / कौटिल्य द्वारा

स्रोत: Chanakya Niti Darpan with Shlokas and Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished132 पृष्ठ

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चाणक्यनीतिदर्पणः ८५

पत्रं नैव यदा करीरविटपे दोषो वसन्तस्य किं नोलूकोऽप्यवलोकते यदि दिवा सूर्यस्य किं दूषणम्। वर्षा नैव पतन्ति चातकमुखे मेघस्य किं दूषणम् । यत्पूर्वं विधिना ललाटलिखितं तन्मार्जितुं कः क्षमः

छं०-पात न होय करीरन में यदि दोष बसन्तहि कौन तहाँ है। त्यौं जब देखि सकै न उलूक दिये तहँ सूरज दोष कहाँ है। चातक आनन बूँदपरै नहिं मेघन दूषण कौन यहाँ है॥ जो कछु पूरब माथ लिखा विधि मेटनको समरथ कहाँ है॥

यदि करीर के पेड़ में पत्ते नहीं लगते तो बसन्त ऋतु का क्या दोष ? उल्लू दिन को नहीं देखता तो इसमें सूर्य का क्या दोष ? बरसात की बूँदें चातक के मुख में नहीं गिरतीं तो इसमें मेघ का क्या दोष ? विधाता ने पहले ही ललाट में जो लिख दिया है, उसे कौन मिटा सकता है ॥ ६ ॥

सत्सङ्गाद् भवति हि साधुता खलानाम् । साधूनां न हि खलसंगतेः खलत्वम् ॥ आमोदं कुसुमभवं मृदेव धत्ते मृद्गन्धं नहि कुसुमानि धारयन्ति ॥७॥

व० ति०-सतसंगसों खलन साधु स्वभाव लेव । साधू न दुष्टपन संग परेहु लेव ॥