भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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८४ १३ ( होकर प्रति ) मम्हूदे मालिक उरू-उमरा मलिक मुबारिक इब्न मालिक बयाँ मरतअ श्मूह बूद ( मालिक बयाँ के पुत्र मालिक मुबारिककी प्रशंसा ) मलिक मुबारिक दुनि क सिंगारू । दान जूझ बड़ बीर अपा[रू*] ॥१ खड़ग राहूँ रूँदि परहिं पहारा । बासुकि काँपैं नाहिं उबारा ॥२ काध छोरइ रकत बहावइ । धर सिर धन तिन्ह माँझ परापइ ॥३ बिधना मारि दस महँ आनी । मागहिं राह छोड़ि निसि रानी ॥४ बिन्द सर दह मुदगर फर पाठू । फेरि नहिं धरै सीध कें पाठू ॥५ जिन्ह जग परा भगानौँ, छोड़ देस नृप भाग ॥६ बीर देखि सरब रुण्ड, गय ते भयौँ लाग ॥७ टिप्पणी—(१) मालिक मुबारिक—इनके सम्बन्धकी जानकारी अन्यत्र उपलब्ध नहीं है। इस ग्रन्थ से केवल इतना ही ज्ञात होता है कि ये मालिक बयाँके पुत्र और डालमऊके मीर (न्यायाधीश) थे। सम्भवतः उन्हें मालिक- उरू उमराकी उपाधि प्राप्त थी। बहुत सम्भव है कि ये चन्दायनके रचयिता मौलाना दाऊदके पिता हों। डालमऊके किलेके लश्करम एक कब्र है जिसे लोग शेख मुबारिककी कब्र बताते हैं। उनके सम्बन्धमें कहा जाता है कि वे सैयद सालार मसूद गाजीके साथ आये थे। नाम साम्यके कारण मित्रों ने उनकी ओर मेरा ध्यान आकृष्ट किया है। किन्तु वे इन मलिक मुबारिकसे सर्वथा भिन्न थे। १७ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) बरिख सात सै होइ इक्यासी । तिहि आइ कवि सरसेठ भासी' ॥१ साहि फिरोज दिल्ली सुरुतान् । जौनासाहि वजीरु बखानू ॥२ डलमठ नगर बसे नवरंगा । ऊपर कोट तले बहि गंगा ॥३ धरमी लोग बसहिं भगवन्ता । गुनगाहक नागर जसबन्ता' ॥४ मलिक बयाँ पूत उबरन भीरू । मलिक मुबारिक तहाँ के पीरू ॥५