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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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८५ [ ] ॥६ [ ] ॥७ पाठान्तर—परशुराम चतुर्वेदीने इस कड़बकके प्रथम चार पंक्तियोंका त्रिलोकीनाथ दीक्षितसे प्राप्त एक पाठ प्रकाशित किया है (हिन्दी साहित्य द्वितीय खण्ड, पृ २७, पाद टिप्पणी २)। यह उन्हें किसी मौखिक परम्परासे प्राप्त हुआ था (हमारे नाम दीक्षितका १९ अगस्त १९५६ का पत्र)। उसमें प्राप्त मुख्य पाठान्तर इस प्रकार हैं— १—इते उन्यासी २–रहिया यह फणि सरस अमासी ३-चितवन्ता । टिप्पणी—(१) जौनासाहि—यह फीरोजशाह तुगलकके वजीर खानजहाँ मकबूलके पुत्र थे। उनका जन्म उस समय हुआ जब खानजहाँके अधिकारमें मुल्तानका इक्त था। उस समय सुल्तान मुहम्मद तुगलकने स्वयं फरमान भेज कर शिशुका नामकरण जौनाशाह किया था। उसे उस समय सुप्रसिद्ध सन्त जकरिया मुल्तानीके नाती सुहरवर्दी सन्त रुक्नुद्दीनका भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। पिताकी मृत्युपर जौना शाह ७७२ हिजरी (१६७ ई) में फीरोजशाह तुगलकके वजीर हुए और उन्हें भी खानजहाँकी उपाधि मिली। उनकी ख्याति अत्यन्त मेधावी और दूरदर्शी राजनीतिज्ञके रूपमें है। वे बीस बरसों तक फीरोजशाहके विश्वस्त सलाहकार रहे। किन्तु अन्तिम दिनोंमें उनका सुल्तानके अधिकारोंके प्रश्नको लेकर शाहजादा मुहम्मदसे जो पीछे सुल्तान बना मनमुटाव हो गया। निदान ७८१ हिजरी (सन् १३८६ ई ) में वे वजीरके पदसे हटा दिये गये और उनका मकान लूट लिया गया। उसी वर्ष उन्हें मलिक याकूब उर्फ सिकन्दर खाँने मार डाला। (२) डलमऊ—यह उत्तर प्रदेशके रायबरेली जिलेका एक प्रसिद्ध कस्बा है और रायबरेलीसे ४४ मील और कानपुरसे ६१ मील पर स्थिति रेलवे जंक्शन है। यहाँ गंगाके कगारके ऊपर किलेका भग्नावशेष अब भी मौजूद है। १८ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) गोबर फह्रां महर फर ठाऊँ। कूवा पाइ बहुत अँभराऊँ ॥१ नरियर गोवा कें तहँ रूखा। देखत रहै न लागे भूखा ॥२

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