चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 109, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें८४ १३ ( होकर प्रति ) महूरे मलिक उल-उमरा मलिक मुबारिक इब्न मलिक वर्षा मखदूम रफूह कूद ( मलिक बयाँ के पुत्र मलिक मुबारिककी प्रशंसा ) मलिक मुबारफ दुनि क सिंगारू । दान जूस पड़ वीर अपा[रू०] ॥१ खड्ग खाइ तैंहि परहिं पहारा । बासुकि काँपै नाहिं उबारा ॥२ फाघ तोरइ रकत पहापइ । घर सिर वन विन्ह माँस परापइ ॥३ बिछना मारि दस महँ आनी । मागहिं राइ छाड़ि निसि रानी ॥४ जिन्ह सर दइ मुदगर कर पाळू । फिरि नहिं घरै सीध क पाऊ ॥५ सिन्धु अग परा भगानाँ, छाड़ देस नृप भाग ॥६ फीर पेन्ह सरब रुण्ड गये ते भयाँ छाग ॥७ टिप्पणी—(१) मलिक मुबारिक—इनके सम्बन्धकी जानकारी अन्यत्र उपलब्ध नहीं है । इस ग्रन्थ से केवल इतना ही ज्ञात होता है कि ये मलिक बयोंके पुत्र और डलमऊके मीर (न्यायाधीश) थे । सम्भवतः इन्हें मलिक उल-उमराकी उपाधि प्राप्त थी। बहुत सम्भव है कि ये चन्दायनके रचयिता मौलाना दाऊदके पिता हों । डलमऊक किलेके खण्डहर में एक कब्र है जिसे लोग शेख मुबारिककी कब्र बताते हैं। उनके सम्बन्धमें कहा जाता है कि वे सैयद सालार मसूद गाजीके साथ आये थे। नाम साम्यके कारण मित्रों ने उनकी ओर मेरा ध्यान आकृष्ट किया है। किन्तु वे इन मलिक मुबारिकसे सर्वथा भिन्न थे। १७ (बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर) वरिस सात सै होइ इक्यासी । तिहि बाद कमि सरसेउ मासी' ॥१ साहि फिरोज दिल्ली सुरतान् । जौनासाहि वजीरु बखान् ॥२ डलमउ नगर बसे नभरगा । ऊपर कोट तले यहि गंगा ॥३ धरमी लोग बसहिं मगवन्ता । गुनगाइक नागर बसवन्ता' ॥४ मलिक बयाँ पूत ठघरन पीरू । मलिक मुबारिफ तहाँ के मीरू ॥५