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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१२ है। यह कोई सौन्दर्य-बोधक विशेषण है। जिसका भाव और अर्थ हमें स्पष्ट नहीं हो रहा है। शिवसहाय पाठकका सुझाव है कि 'मराउ' का तात्पर्य 'मराळ' से है और 'रुप-मराउ' का भाव है 'मयूरके समान सुन्दर'। (४) सापर-सपन। बार-घोड़ा। (५) सरम-सदृश, तद्रूपकार। (६) मूँजहि-उद्वेग कर। सासन (सं शासन)—राजाज्ञा अंकित ताम्र- पत्र। सासन गाँव-राज्यादेशसे प्राप्त ग्राम। २८ ( रत्नकण्ड ९ ) सिफत बाजार शरिपात शहरे गोबर व खरीद्ने खल्क (गोबर नगरके सुगन्धिके बाजार तथा वहाँकी खरीददारीका वर्णन) सुनो फूल हाट सब फूला। बीठ विमोइ गा देखत भूला ॥१ अगर चन्दन सब धरा बिकाने। कुंकुं परिमल सुगंधि गंधाने ॥२ बेनाँ और केवर सुहाया। मोल किये [पर*] महँक (सुँघाया) ॥३ पान नगरखण्ड सुरंग सुपारी। जैफर लौंग झिकरी झारी ॥४ दौंनाँ मरबा कुन्द निवारी। गूँदह हार ते बेचहिं नारी ॥५ खाँड चिरौंजी दाख खुरहुरी, बैठे लोग बिसाइ ।६ हीर पनेर सों भल कायड़, जित चाहे सब आइ ॥७ मुखपाठ-(१) सुनावा। टिप्पणी-(२) धरा-धड़ा पाँच सेरका तौल। कुंकूँ-केसर। परिमल-कई सुग न्धियोंको मिलाकर बनाई हुई विशेष बात (वासुदेवशरण अग्रवाल)। (३) बेना-बीरन छत। केवर-केवड़ा। (४) जैफर-जायफल। (५) दौंनाँ-तुलसीकी जातिका पौधा जिसकी पत्तियोंमें सुगन्धि होती है। मरबा-(सं मरुवक) यह फाल्गुन-चैतमें फूलता है। इसके फूल लाल और सफेद दो रंगोंके होते हैं। कुन्द-सफेद रंगका छोटा फूल जो अगहन-पूसमें फूलता है। नेवारी-इसे निवाड़ी भी कहते हैं। यह चैतमें फूलनेवाला सफेद फूल है। आइने अकबरीमें इसे एक दलेका फूल कहा गया है। यह रायबेलसे मिलता जुलता है। सवेरे फूल इतने अधिक आते हैं कि पेड़ ढक जाता है।