चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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(६) खाँड—शक्कर, चीनी। खुरहुरी—पद्मावतमें इसका उल्लेख हुआ है। वहाँ वासुदेवशरण अग्रवालने इसकी व्युत्पत्ति क्षुद्रखुरली—क्षुदखुरली—खुरहरी बताया है और वाट कृत डिक्शनरी आफ द इकनामिक प्राडक्ट्स (भाग २, पृष्ठ ११४) से इसके अनेक नाम गिनाये हैं। (पद्मावत २८।४)। पर हमारी दृष्टिमें यहाँ तात्पर्य छुहारेसे है। (७) हीर—इसके कई अर्थ हो सकते हैं। (१) ईराक स्थित हीरक बने हुए वस्त्र। इब्न-बतूताने वहाँके बने दीवाज (जरीका बना वस्त्र) हरीर (रेशम) और चित्रित तासीकी चर्चाकी है जो वहाँ इस्लामके उद्भवसे पूर्व तैयार होते थे (आल इस्लामिया, खण्ड २, पृ ८९)। किन्तु इस्लामके युगमें इस स्थानका महत्त्व घट गया था। इस कारण कदाचित इससे यहाँ तात्पर्य यह न होगा। (२) मोतीचन्द्रका कहना है कि हेरातके मार्गसे जो वस्त्र भारत आते थे वे पट्टहरि अथवा हीरपट्ट कहे जाते थे। (कास्ट्यूम्स ऐण्ड टेक्सटाइल्स इन सल्तनत पीरियड पृ १४)। (३) ऐसा वस्त्र जिसपर हीरेकी आकृति हो (यह सुझाव भी मोतीचन्द्रका ही है)। हो सकता है यहाँ इसीसे तात्पर्य हो, क्योंकि लहर-पटोर ऐसा प्रयोग पद्मावतमें मिलता है (१२९।१) जिसका तात्पर्य लहरियादार पटोर है। उसी प्रकार यहाँ हीर पटोरसे तात्पर्य हीरेकी आकृति अंकित पटोरसे हो सकता है। (४) लोककी बोलचालमें किसी वस्तुकी सर्वोत्तम छाँटी हुई वस्तुको उस वस्तुका हीर कहा करते हैं। हमारी समझमें उसी अर्थमें यहाँ इसका प्रयोग हुआ है। हीर पटोरसे तात्पर्य है उच्च कोटिका पटोर, अथवा बारीक किस्मका पटोर। पटोर—देखिये आगे १२।७।
२९ ( सैकँण्ड्स १ ) सिफ्ते बाजीगरों दर बाजार शहर गोबर गोयर (गोबर नगरके बाजीगरोंका वर्णन)
हाट छरेंटा पेखन होई। देखहिं निसर मनुस औ जोई ॥१ परढा राम रमायन कहहीं। गावैहिं कबिच नाच मल फरहीं ॥२ बहुरुपिये बहु भेस मराषा। मार युद्ध चलि देरैं आवा ॥३ रासैं गावैंहिं भइ झलझार्वहिं। संग मूद बिस बँह वहावैहिं ॥४ फीनर गावैंहि होई पँवारा। नट नाचहिं औ बाजहिं तारा ॥५