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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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नाट हँकारे कूद धरि, हम देखा होइ अबार ।६ नवैइ बधावा गोवर, घर घर मंगलाचार ॥७ टिप्पणी—(१) छरहूँ—सं० च्छरह = छलका बाजार, जादूका तमाशा । पेखन— सं० प्रेक्षण = नाटक तमाशा । जोई—स्त्री । (३) परथा—पत्री । राम रमायन—इस उल्लेखसे यह स्पष्ट प्रकट होता है कि तुलसीदास कृत रामायणकी रचनासे बहुत पूर्व लोकमें राम कथा ख्यात हो चुकी थी और लोग रामयण नामक किसी रचनासे खूब परिचित थे और उसका पाठ किया करते थे । मखतूल उठक चिन बनते थे यह २ ५८ कड़वकसे ज्ञात होता है । अन्यत्र भी कई स्थानों पर रामायणकी घटनाएँ अभिप्राय रूपमें गृहीत हैं । (५) सीसर—सिषर, सम्भवतः यहाँ तात्पर्य हिचकोले है । (६) भवान—भवाणी > भवानी > भवान गृह । ३० ( रीव्ह्यूंस ११ ) सिषत दरबारे राज महर गौरब ( राज महरके दरबारका वर्णन ) कञ्चा महरिह बारि बखानि । बैठ सींह गइ से घरै बनानी ॥१ बहुत बीर तिंह देख पराहीं । हियें लाग डर खेंद न खाहीं ॥२ देखत पौर दीठि फिरि जाइ । एक पूत सतधार उँचाई ॥३ आँट रूप कै पानी ढारा । अस कै महरि दुआरि सँबारा ॥४ साठ लोह एकहिं कौटाने । बबर केवार पौर गइ छाने ॥५ राखहिं वैसे चौकी, कुन्त ढरग रहि छाइ ।६ पाखर सहस साठ फिरि, खाँड़ेहिं सैंचर न जाइ ॥७ टिप्पणी—(१) बारि—घर, निवास स्थान । सींह—सिंह; मध्यकालीन घरोंके प्रवेश-द्वारपर दोनों ओर दो सिंह बनानेकी प्रथा थी। उन्हें प्रायः मरोड़दार पूँछ फटकाते और जीभ निकाले हुए बनाया जाता था। बनानी—बन्द, भाँतिने तुलना कीजिये—सहु बनानके बाहर गये (पदमावत ४१। )। (५) केवार—किवाट दरवाजा । (६) कुन्त—पैदल सैनिकों द्वारा प्रयोगमें आनेवाला बर्छा ।