चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०१ ४२ ( रौकन्दुम १२ ) रधौ बर्दन जीत बरात निकार कर बर्दन घर खाने रपि महर ( विवाहके निमित्त रपि महरके घर जीतका दारात खाना करना ) मार सहम दोइ लादू लावहूँ । घाँघर पापर बहुतै पकावहिं ॥१ कीन्ह खिरौरा औ केसारा । फल कंडोर भये अमेभारा ॥२ चीर पनेर पराठी माँगा । टाँका लास सो अभरन लागा ॥३ हाँडी अमी नव इक घली । एक एक वाह सो एक एक पहली ॥४ सात आठ मे घोर पिलाने । भये असवार राइ औ राने ॥५ जस वसन्त रितु टसू फूलें, जिह अस देसी रात ।६ भाट फलावत बहुरिया, तस होई चली बरात ॥७ टिप्पणी-(१) खिरौरा-इसका उल्लेख जायसीने भी किया है (पद्मावत ५८९।२); ग्रियर्सनके अनुसार चाँवलके आटेसे गर्म पानीमें बनाय हुए लट्टू (बिहार पेजेंट लाइफ पृ १४०) । केसारा-सम्भवतः कसार, आटा भून कर शकर मिलाकर बनाया हुआ मण्डू । यह पूर्वी उत्तर प्रदेशमे विवाहके अवसरपर विशेष रूपसे बनाया जाता है। कंडोर-सम्भवतः गुड़ पाट कंडोर होगा । इसका तात्पर्य मिठाईसे होगा । (३) टाँका-टका; दिल्ली सुल्तानोंके समयमें प्रचलित चाँदीका सिक्का जिसका वजन १६८ १७ ग्रेन था । (५) पिलाने-पोस हाथी । (७) फलावत-गायक । बहुरिया-नर्तकी । ४३ ( रौकन्दुम १३ ) निपन्दीन्ह जीत रा हर जाने ब यादन निकार कियान पान्त्र क च दा ( जीतका स्वागत और बाचन चाँदका विचार ) उठी महर यनसार गँवारी । आन परान महो दैगारी ॥१ दीपर नल पनेर दिसाइ । सुरुभी एक पग निद राइ ॥२