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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५ टिप्पणी—(१) उत्तर पदका मैस एक वरब बहिराये पाठ भी सम्भव है। किन्तु तीसरे यमकको देखते हुए मैस पाठ यहाँ सम्भव नहीं है। अरबकी अपेक्षा वरब मूल शे'रके अधिक निकट है। (५) सौर—ओढ़ना-बिछौना। दिल्ली मेरठकी बोलीम सौरका अर्थ रुइ भरी रज़ाइ है जो ओढनेके काम आती है। चित्रावली (२१९।७) से ज्ञात होता है कि रुइ भरे हुआ बिछानेके गद्देको सौर कहते हैं (सौरि माँह बिन बिनठर टोवा। फुस साँचरि सो कैसें धोवा ॥) जायसीने भी इसका कई स्थानोंपर उल्लेख किया है (१३९।२, ३३५।४ ३३६।६, १४ ।२) पर उन्होंने सौर-सुपेती युग्म का प्रयोग किया है और उसका तात्पर्य कहीं ओढने और कहीं बिछौनेसे है (देखिये—वासुदेवशरण अग्रवाल, पदमावत ३३६।४ टिप्पणी)। (६) चाउर—चावल। कनक—आटा। खाँड—शक्कर, चीनी। घिउ— घी। लोन—लवण नमक। बिसवार—मसाला। (७) राँध—सामग्री। सुकराना—शुकराना दहेजम प्राप्त वस्तुएँ। ४५ (रैडिंग्क्स ३५) बुशायददुम साले शुदन निकाह चाँदा ब बामन व नज़दीक नेशामद ने बामन (चाँदा-बामनके विवाहके बारह साल बाद, बामनका चाँदाके पास न आना) बरख दुआदस भयउ बियाहू । चाँदा सरै सोफ जस नाहू ॥१ उनत जोबन भइ चाँदा रानी । नाँहछोट औ अँखियी फनी ॥२ जाफहिं पिउइर बोलँ लोगू । सो पै चाँद न दीन्हों मोगू ॥३ हाथ पाठ मुख धरम न धोवा। औ तिह ऊपर संग न सोवा ॥४ दह्या फौन मैं कीन्हि पुराई । सरै कचोरें थूकेउ आई ॥५ रात दिवस मन झुरनइ, ऊपह सास फेरोई ।६ चाँद धौराहर ऊपर, बामन धरती सोइ ॥७ टिप्पणी—(१) दुआदस—द्वादश बारह। नाहू—नाथ। (२) उनत—उन्नत उभरा हुआ। नाँह—पति। (५) कचोरे—कटोरा। ⁀