चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२७ चौरहँ' जौन देखि पाँ लागहिँ । पाप केत परसहिँ कर भागहिँ ॥४ रूप पुतरि गइ दस नख लावा । तरुवहिं रकत भू सर बलि भावा ॥५ पायि परौं मुख जोरूँ, सो धनि उतर न देइ ।६ सुनत राठैं बिसँमरि गा, मर मर साँसें लेइ ॥७ पाठान्तर—पंजाब प्रति— इस प्रतिरी उपलब्ध पोथमे लाल स्याहीते लिखी पंक्तियाँ अत्यन्त अस्पष्ट हैं। फलतः शीर्षक और तीसरी पक्तिका पाठ सम्भव न हो सका। पृष्ठ फट जानेसे पंक्तियाँ ५-७ भी अप्राप्य हैं। १—रस्म । २—फड़ाये । ३—गढ । ४—भौ छभतोलु हिय तर अस धरा । ५—बिमोहहिं । ६—जाहि । ७—लागी । ८—भागी (पूर्व पद के अनुसार) । ९—तष्चन । ९२ ( रीसँकडस ५१भ ) सिफते पाय व रफ्तारे चाँदा ( पग और गति वर्णन ) हँस गँवन ठुमठुमकत आवइ । चमक चमक धनि पाउ उघावइ ॥१ झनक झकरू पाँ धरती धरा । घमक घमक अनु सुगवि भरा ॥२ सेल मन्हान सों चाँदा आवइ । बानों छीनरि बेगु उघावइ ॥३ सर सुईं धरउँ चाँद धरि पाऊ । नान हुइँ न फादेउँ गाऊ ॥४ पागेँ धूर नैन भरि अँजीं । जीभ काढि दुइ तरुवा माँजौं ॥५ चलत चाँद चित लागा, मनहुत उतर न फाउ ।६ पाँयहि हाथ न पहुँचे, हँस हँस रोवइ राउ ॥७ टिप्पणी—(१) उघावइ—उठाती है। (२) पौ—पाव पैर। (४) सुईं—पृथ्वी। नानहुइँ—क्षुद्रपन म हीं। (५) धूर—धूलि। आँजीं—अञ्जन की तरह लगाऊँ। तरुवा—तालू, पैर का निचला भाग।