भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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११४ होता है। हरियांत—हल्का हरा रंग ऐसा रंग जिसमें हरीतिमा की भाभा हो । (१) पखारी—पंख से युक्त । ९९ (रौकेण्ड्स ५७) सिफते पीलाने राव रूपचन्द गोयन्द (राव रूपचन्द के हाथी) पखरे हस्त दाँत बहिराये । धानुक लै ऊपर बैसाये ॥१ बनखंड जैस चले अविकारे । आने आनु मेघ अँधकारे ॥२ चलन लाग जनु चलहिं पहारा । छाँह परै अग मा अँधियारा ॥३ झँकरहि घोटहिं बाँकुस लागे । बर दस कोस सहस अग भागे॥४ जो कोपहिं तो राइ सँभारहिं । बन तरुवर अर मूर उपारहिं ॥५ सींकर पाइ बानि उठ, तरै काँदो होइ ।६ राठ रूपचंद कोपा, तेग न पारे कोइ ॥७ टिप्पणी—(१) पखरे—पाखर; हाथीके दोनों कानोंकी लोहेकी झूल । बहिराये— निकाले हुए । धानुक—धनुर्धारी सैनिक । (४) बर—आगे । (५) अर मूर—जड़मूल । (६) काँदो—कीचड़ । १०० (रौकेण्ड्स ५८) सिफते कूच कर्दने राव बाकरफरे काहिरा (सेनाकी कूच) सबही गजदल भयउ पयाना । ठोके सबल देत अँगराना ॥१ अफछत फौज चले असवारा । कोस बीस सग भयउ पसारा ॥२ आगं परे नीर खीर पावइ । पाछ रहे सो धूर पकावइ ॥३ सगरैं देस भइउ डर छावा । सबै नराएँ राउ चल आवा ॥४ उठे खेह अरु खग न पागा । जानु सरग परती होइ लागा ॥५