चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३५ महतै साथ माँठ लै, राजा कीन्ह पयान ।६ तरैं ताब बासुकि खरभरे, सूरज गयउ लुकान ॥७ टिप्पणी—(१) पयावाँ—प्रयाण प्रस्थान रवानगी । सबद—झंकार । (२) अक्खत—अक्षत अपार । पसार—प्रसार, फैलाव । (४) सगरैं—सारे । मराईँ—नरेश । (७) खेह—धूल । (६) महतै—महत्, श्रेष्ठ अर्थात् ब्राह्मण । १०१ ( रीसॅण्ड्स ५९ ) दर राह फाल नअिस आमदन पेरो शब रूपचन्द व मने कर्नन महता (राहमें अपसकुन) सूखे रूख काग रिरियाये । जोगी आवा भसम चढ़ाये ॥१ दहिने दिसिहुत मरा आवा । डँजरू बायें हाथ बजावा ॥२ उत्तर सूर दिसि फुकरी सियारी । अरु सूरैं रकत दीख रतनारी ॥३ कुसगुन भये न बहिरै राऊ । न बहिरै न देखेउँ फाऊ ॥४ महते जाइ राउ समझावा । कुसगुन भयउँ कित आगे भावा॥५ चाँद सनेह काम रस बेधा, राजा गा बउराइ ।६ एको सगुन न मानी राजा, गोवर छेकसि आइ ॥७ टिप्पणी—(६) गा—हो गया । बउराइ—पागल । १०२ ( रीसॅण्ड्स ६ ) गिर्द कदन राव रूपचन्द शहर गोवर रा व दर हिसार मान्दन शहर (गोबर नगरपर रूपचन्दका घेरा) चहूँ दिसि छेकइ गाड़ फिरावा । खोंटहिँ घाट ओरि गर छावा ॥१ तुरिहिँ पान-बेलि पन्हारी । फेतिह खेत रूख फुलवारी ॥२ काटे चहुँ पास अँधराऊँ । तार खजूर आम लखराऊँ ॥३