चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४५ घोटहिं महावत आँकुस गहैं। पन कुंजरैं डर राख न रहैं ॥४ सावन मेघ ओनइ जनु रहे। पखरे कीनर परिखहिं पड़े ॥५ बीजु माँव घन परे, परे छाएँ रन आइ ।६ उठे खेह दर पौदर, सूरज गयउ सुझाइ ॥७ मूलपाठ—१—नाच । टिप्पणी—(१) औनइ—घिर । ११७ ( बम्बई ३६; रीफेण्ड्स * ) रूजे दुवम राय रूपचन्द कसदे हिसार करदन व बीरून आमदने महरा बग कदन उफ्तादन ( दूसरे दिन राव रूपचन्दका कुरांकी ओर आना और महरका युद्ध के लिए बाहर निकलना ) राउं रूपचन्द गढ़ होइ पावा¹ । राहैं महर दर आपुन सावा ॥१ फिर संजो भाँठहिं² हथबासा । फेंवरू धँवरू³ पाउ हुलासा ॥२ पाँठ कहा अर सोंको आही । मिया मरसि उठु घर बाही ॥३ फेंवरू तदपि सांड कें⁵ फाढ़ी । झेसस करी सम⁶ देखें ठाढ़ी ॥४ पाँठ वाफ खड़[ग*] गहि मारा। फिरें मामद⁷ धढ़ गयउ उपारा॥५ दीठि भुलान खड़ग वो चमका, हाथ फिरें हथ जोत ⁹ ।६ लाग गाँठ पाँटा कर, कँवरू गा भुइ लोट¹¹ ॥७ पाठान्तर—रीगेण्ट्स प्रति— शीर्षक—नमूदार शुदने हरदू फौज्हा ब हम कदंने कँवरू बा बाँटा व कुश्ता शुदने ऊ (दोनों सेनाओ का सामने सामने आना और कँवरू-बाँठा का युद्ध; कँवरूका मारा जाना) । १—रहा । २—यह शब्द छूटा है। ३—गाउ। ४—मंजोर। ५— ढाँड । ६—भागी। ७—ती। ८—मद । —को । ९—मग। ११—फिरे हाथ हथ जूट । १२—सुन । १