भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४६ ११८ ( रीडीण्ड्स ७१ ) आगे कथने भैंबरू का चाँद व गुफ्तः शुदने भैंबरू ( भैंबरू-चाँद युद्ध ) भैंवरू देखा कँवरू परा। रोहतास जैसे परबरा ॥१ हाथ साँग मारसि तस आई। फिरें लाग धड़ गयठ जुझाई ॥२ फुनि झाड़सि बिजुरी तरबारा। ढाफ दइ कें हनसि कपारा ॥३ टूटि खाँड तातर सभ धावा। पीठि कहा हौं इहँ पै पावा ॥४ फुनि लेँहति काड़सि सरबानी। तँहुत माँठा चला परानी ॥५ खेदत उड़झा भैंबरू, परा दाव सँहराइ ।६ पलटि भाँठ जो देखा, तो बहुरि मारसि आइ॥७ , टिप्पणी—(१) साँग—एक प्रकारका भाला जो बहेंस्ते डोय अर्थात् ७-८ फुट लम्बा होता है और उसका सिरा ढाई फुट लम्बा और पतला होता है। उसका दण्ड भी बांसेका होता है। (अर्विन आमीं आफ द इण्डियन मुगल्स) (२) खेदत—पीछा करते हुए। उड़झा—ठोकर खाकर गिरा। ११९ ( रीडीण्ड्स ८ ) धादिदाना रखन दर लश्करे राव रूपचन्द अज हिरसते फौम ( राव रूपचन्दकी सेनामें विजयोल्लास ) साखी तार दीठ बन मार। और हँवर महरें के द्वार ॥१ दीठ आनें बांधि खपाई। पाँयक मठ फरहिं नवाई ॥२ रकत लहू है सरपर भग। एकौ कुँवर न आगे सरा ॥३ जिन्द देखा तिन्द गयठ परानों। डर सहँ फोट न करें पधानों ॥४ वे महर जेठनाग जिवाये। सगरैं पीर न काऊँ आये ॥५ मार कहा महर सों, शापैं ना यह बीर ।६ बग हँकार पठावहु, लोरक बावनबीर ॥७