भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५२ सिन्दुर है, जिसका अर्थ होता है हाथी। मध्यकालीन कलामें सिंह हस्ति एक अति प्रचलित 'मोटिफ' रहा है। (७) रोप—(धा०-रोपना) गाड़ना, दृढ करना। (४) सारमार—लोहेके तार का बना हुआ (सार—लोहा (सुने नागकी साँस चा सार भसम होइ जाय)। १२९ ( रौ०सूहस ८८ ) दैवत तुरने रूपवन्त व फिरिआदन भट ( रुक्मङ्गद भयभीत होअर दूत भेजना ) चहुँ दिसि दंस राठ डरि आधा। रहा अचल होइ चल न चलावा॥१ बीर चिलापहिं जाइ कहाँ। कौन उत्तर अस दीजै वहाँ ॥२ ओछे दर हम पावैं आय। अनैं पौर अब लाइ न जाय ॥३ देख मंदिर महँ ठागी लाजा। पौर राज ओ जिहैं सइँ माजा ॥४ काहू सा मन्त कर बिचारे। जे रहे मौन सो आगैं झारे ॥५ राइ भाट कह पठयं, महर गइ अब गाठ ।६ एक एक सइँ इसै, दूसर नर नहिं जाउ ॥७ १३० ( रौ०सूहस ८९ ) बाव गछन भट व मग रूंदने सींह व जुझना सुदन क ( दूतका लौटना युद्धमें सींहका मारा जाना ) बहुरे भाट दिवाई पानौं। महर बोल राजा कर मानौं ॥१ बाँठ असार फुरै लै आवा। पाछै सरे नहिं जिह कर पावा ॥२ सींह सिंगार धीर दुइ आये। राइ मथा कर पान दिखाये ॥३ जोउन सींह अकेले उतरा। हाथ खड़ग खसि धरती परा ॥४ अइ दूत अनै कुसगुन अस भयऊ। सींह सिंगार छोट रन गभऊ॥५