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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१५१ साँइ लाग रन रीसे, झाँप उठी नपार ।६ नहाँ भयउ जर फैंवरू, फाटसि खेद सिमार ॥७ टिप्पणी—(१) फुरै—तत्काल । १३१ ( रौलेन्दूस ९ ) जंग करने सिंगार का बाँगा व पुनः कूदने सिंगार ( सिंगार-बाँगा युद्ध : सिंगारकी मृत्यु ) देख सिंगार कोह चर चढ़ा । बाँध फरहरा आगे सरा ॥१ दाँव गहसि सर खाँड़इ घाऊ । तातर टूट काढ़ि गा पाऊ ॥२ दूसर खाँड लिहसि तरवारी । भिरे माट घर गीउ उपारी ॥३ दाब सिंगार चीर तम मारा । पिछला खाँड टूट गइ धारा ॥४ पुनि जमधर साँचे कर गहे । बजर चोट सर घेरेँ सहे ॥५ बिनु हथियार भया राउत, परिगा थाक सिंगार ।६ एक चोट दाइ फीतस, धर सों फाट कपार ॥७ टिप्पणी—फारसी शीर्षक असंगत जान पड़ता है। इस कड़बकमें बाँगाका कोई उल्लेख नहीं है। इसमें केवल सिंगार के युद्धकी बात जान पड़ती है। (१) फरहरा—फहराता झंडा । (३) गीउ—गरदन । (५) जमधर—छुरी नोकवाली कटार । १३२ ( रौलेन्दूस ११ ) भागने ब्रजराम व धरमूँ भज हरने राव रूपचन्द व पुनः कूदने ब्रजराम ( राव रूपचन्दकी ओरसे ब्रजराम और धरमूँका भागना और ब्रजरामका मारा जाना ) ब्रजदास धरमू दुइ आप । राइ भया कर पान दिवाय ॥१ आज मुदिन जाइहूँ पन्तार । गाँउ टाँउ कापर मैं सार ॥२