भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१८८ (१) (पंजाब [क]) आइ महावत [ ] अलापा। माइ महावत असपत धावा ॥१ [----] लोरक [----] नाँ। जानु पहरु झाऊ कै बनां ॥२ [ - ] । [ ] ॥३ भट लोग भये असबारा। काढे बेरुफ होइ चमकारा ॥४ चढ़ेहि लोर तैं बाहु परा[ई]। [ ] कें न नहि पड़ा[इ] ॥५ [ ] छाड़ जाहु [ ] ।६ [ ] ॥७

(२) पंजाब [क] लोरक हरक खेद भिराई। धीर [ ] ॥१ [ ]र गढ़ै जिह सेस बैसा [रे]। पाठ बेरी [ ] ॥२ [ ] । [ ] ॥३ रमफ बन नान क[ ]बिस मोही। घर नर [घ]हुत न दे[खी] तोही ॥४ घर घर अछे [ ] नाँ मान। चित मन माठ [ - ] ॥५ [ - -- ] ।६ [ -] ।७

(३) (पंजाब [ख]) [ ] राज मधुबर लोरक रा [ ] (१) रादा महता एक मन्तर कीन्हा। लोर बुलाइ पान लै दीन्हा ॥१ लोरक काज अन्दारा कीयइ। पयना मोर हरेवहि दीजइ ॥२ बयना पाति आगें अरघायसु। परहितहिं पठया लार फुलायसु ॥३ पाहा कापर खारहिं छीन्दौं। इहवहिं समुदित अंका सीन्दौं ॥४ ताकें सार साहि [----]गवा। पाँइ तिहैं तह क धावा ॥५