चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८७ पाठान्तर—मनेर प्रति— शीर्षक—दास्तान सिफ़ते मौलाना दाउद व गुफ़्तारे ऊ (मौलाना दाऊद और उनकी रचनाकी प्रशंसा) १—दाउद कवि जो चौंशा गाईं । २—र । ३—बोल । ४—आखर । ५—छाँप उसी हीं सोइ बखानी । ६—काय । ७—सुनाथैँ । ८—मुक्लिक नयन सुनु बोल हमारी । ९—बनइ । १ —एक एक बोलि मौति अस फिरवा, कहउँ भो हीरा तोर । ३६१ ( मनेर १७१ ब ) विदभा कर्दने लोरक हकीम रा ( लोरकका चिकित्सकको बिदा करना ) गारुर समुँद चाँद लै चला । तैं हँ बात कहसि अति भला ॥१ बायें दिसि तूँ लोर न जाबसु । दाहिनें बाट बहुत फर पावसु ॥२ पिरम भुलान यह बोल न मानी । भाट चलत सहाइ न आनी ॥३ डांडी के लोरक चाँद चलाई । दाहिनें दिसिवैं दिस्टि मिलाई ॥४ घर आपुन दण्ड छाड़हि कहीं । जहाँ परिरोहि ठाड़े तहाँ ॥५ बार अँधवतैं जाइ सुलाना, लोरक सारगपूर ।६ दिनकर मूँड ऊघावा, राता जैस सिंदूर ॥७ टिप्पणी—(२) फर—फल । (४) डाँडी—एक प्रकार की पालकी । (५) परिरोहि—मना करें । ठाड़े—खड़ा । (६) बार—दिन । अँधवतैं—अन्त होत ही । सुलाना—जा पहुँचा । ३६२-३७० ( अनुपलब्ध ) अनुमान है कि पञ्जाब प्रतिम प्राप्त निम्नलिखित चार कड़वक इस स्थान के होंगे। किन्तु उनका क्रम और उचित स्थान निश्चित करना सम्भव नहीं है ।