चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८९ मसबै फरसा निसरान, अइषा राख जो राजा [ ] ॥६ घोडैँ चढ़ेठ लोरक तिहाँ, चल [ - - ] ॥७ (४) (पंजाब [ख]) सुनि कै महुअर फोट उछावा । जानसि लोरक मारे [आया*] ॥१ गइ महँ कीन्हें काष सराचा । काट घरैँ [ - -]ावा ॥२ [ - ] इरबहि राउ डिंग [ ] । इरदीपाटन देस दिखाये ॥३ हमरै अइस दूरी न कीजइ । एक चढ़ाई भेद बहु दीवइ ॥४ अइस पुरुसँ आइ समानाँ । पुरुख तिरिया देखहि बहिराना ॥५ [ - - - - - - ] ॥६ [ - - - ] ॥७ टिप्पणी—ये चारों पृष्ठ जीर्ण हैं तथा उपलब्ध फोटोमें लाल स्याहीसे लिखी पंक्तियाँ स्पष्ट नहीं हैं। अतः प्रस्तुत पाठ सम्भाव्य वाचन मात्र है। ३७१ (मनेर १०३ख) बहोश शुदन चाँदा आँबा वा लोरक गुफ़्तन (चाँदाका होशमें आना और लोरकसे कहना) उठ गइ चाँद सँ नींद भल आई । जस सपनैं हीं नागन्हि खाई ॥१ फइसि पिछार पथ सर जाहीं । सपनहि सो ठिक पूछी नाहीं ॥२ सपनहि थार में गतरउ टीसी । कान्हि रन बो रन मँह पैसी ॥३ फरम हमार सिंघ एक आवा । जिहुत हम तुम्ह पर मिरावा ॥४ पाउ सिंघ कै छाड़ेउँ नाहीं । नभ लगि जीयहुँ सेउ कराई ॥५ देह अमीस सिंघ अस बोला, लोरक तूँ मुर माइ ॥६ पार माझ एक हूँटा बोगी मत बाँदहि लइ जाइ ॥७ टिप्पणी—(६) मुर (मोर)—मेरा । (७) हूँटा—अस्करी न इसे 'टोंटा' पढ़ा है और टन तोता (पक्षी) के रूपम ग्रहण किया है पर यह स्पष्टतः बोगीका विशेषण है । मनेर प्रतिके १