भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२१ पृष्ठ १४७-ब (कडवक १७४) के शीर्षकसे जान पडता है कि उस प्रतिके तैयार करने वालेने इसे 'टूँगा' पढा था (उसने इससे हाथ पाँव कटे होने का अभिप्राय ग्रहण किया है) । सम्भवतः इसका तात्पर्य किसी सम्प्रदाय विशेषके योगीसे है । टूँडा या ढूँवा नामक किसी योगी सम्प्रदाय की जानकारी हमें नहीं है। हो सकता है यह अपपाठ हो । १७२ ( मनेर १०१-ब ) नैं लोरक, तुरा रोजे बद उफ्पद मारा याद कुन ( लोरक यदि तुम पर विपत्ति आये तो मुझे स्मरण करना ) लोरक को तिह पीरा परही । चाँद तोर जो टूँटा हरई ॥१ दइ सँवरि मुहिं नैबरसि लोरा । ठाठें ठाठें मैं आउब सोरा ॥२ पसना कहि सिध चला उठाई । चाँद् लोर (दोइ) रहे सुमाई ॥३ परि इक सिधमैं पइठ नबाई । पुनि उठ चलि कै बाट घटाई ॥४ दवस चारि जो चलतहि भये । नगर एक पैसारथ किये ॥५ लोरक कहा चाँद् तुम्ह बइसहु, हौं सो नयर महँ आउँ ।६ कनक अन औ लागती, बर बेचन कछु र कराउँ ॥७ मूलपाठ—(१) बोर । टिप्पणी—(१) परहा—(इतना) बह । (५) पैसारथ—प्रवेश । (६) बइसहु—बैठो । नयर—नगर । (७) कनक—गेहूँ । अन—अन्न । १७३ ( मनेर २ प.अ ) दरमियाने कुश्तानए त्रिभुभान चाँदा रा मौद ( चाँदाको मन्दिरमें बैठाया ) चाँद मढ़ी बैठार छुपारई । लोर नगर महँ सीदँ आई ॥१ दूतं छभित देखि तों पावा । छंदलाइ चाँदा पहँ आवा ॥२