चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९१ आसन मारि बैठ तिह आमी । अब मों पहँ कित चाँदा जामी ॥३ सिंगी पूर नाद तस किया । जन बैसन्दर परा विष दिया ॥४ सुनतहि चाँद बेधि तस गई । अपछठ मरन सनेही मई ॥५ जस अहेरिया पा बिरख, भिरिग बेधि लै जाइ ।६ टूटैटा भयतें अहेरिया, चाँदहि गोइन लाइ ॥७ टिप्पणी—(१) सौंहै—(इस वस्तुके) भ्रमके निमित्त । (२) कबिड—छवि । कँडकहूँ—बहाना बनाकर । पइँ—पाछ । ३७४ ( मनेर १७७ख ) चीजी कपसून इंसान कि चाँदा दीवान शुद ( उसका जादू करना चाँदका पागल हो जाना ) सिंगी पूर मन्त्र सो लाषा । चाँद सुन कछु चेत न आषा ॥१ चाँदा गोइन लइ चला भुलाई । गाठ गीत औ कछु न फराई ॥२ तइस संग भइ चाँद सुभागी । गाँव गाँव फिरि गोहन लागी ॥३ देखि सिंघ औ कण्ठ अधारी । भूली कछु न सँभारी घारी ॥४ चाँदहि बिसरा सब सर्वंसारू । बिसरा लोर जैं जीठ अधारू ॥५ सुनै नाद अउ देख, पाछे हेरि न बारि ।६ लोर आइओ देखी मढ़ी, चाँदा बिनु अँधियारि ॥७ ३७५ ( मनेर १७५क ) यूँ लोरक आमद व बीनदके चाँदा दर बुतखाना नीस्त ( लोरकने लौटकर देखा कि चाँद मन्दिरमें नहीं है ) सुनि मढ़ी देखि लोरक राषा । काहे कहूँ बिधि कीन्हि बिखोषा ॥१ अबहूँ जा र सरग चड़ धावउँ । तो वहँ खोज चाँद कर पावउँ ॥२ लार चहु दिसि भँमि भँमि आवा । खाय चाँद कर राव न पावा ॥३ रैन गइ पै चाँद न पाइ । उठा सुरुज चलि खोज फराइ ॥४