चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१२ आजु राति जो चाँद न पाई। सारस भरु र मरौं भदाइ ॥५ ठाँउ ठाँउ सो लोरक पूछी, न सुना एक सिंघ पाइ ॥६ अँधयें सुरुज चाँद जस तिरिया, टूँटा देखि लइ धाइ ॥७ टिप्पणी—(५) सारस—सारस दम्पतिका अटूट प्रेम प्रसिद्ध है। एकके मरने पर दूसरा भी अपना प्राण दे देता है। ३७६ ( मनेर १०१ब ) चूँ शनीद लोरक कि दस्त पा बुर्रीदः कर दरख्त ( लोरकने सुना कि उसके हाथ पाँव कटे हैं ) लोरक जो टूँटा सुनि पावा। खोजत खोज जाइ नियरावा। नगर एक पइसत सुधि पाई। टूँटा सग तिरिया एक आई ॥२ पीर नगर सो धाइन लागा। फीक होत टूँटा कर रागा ॥३ सुनतहि नाद लोर गा आई। देख चाँद मन रही लजाई ॥४ दौरि लोर टूँटा कर गहा। अरि भिखारि सिंह मारतैं काहा ॥५ धरी जटा ले चला राउ पहँ, तोहि फिराऊँ घरि ॥६ झूँठि जटा लगि पहिरा छै, औहट मा चलि दूर ॥७ टिप्पणी—इस कड़बकका शीर्षक टूँटा के शाब्दिक अर्थ पर आधारित है। विषयसे उसका कोई सम्बन्ध नहीं है। (१) खोजत—खोजते हुए। (२) पइसत—प्रवेश करते ही। ३७७ ( मनेर १०२अ ) चश्म कुशावद कर्द व दीदने टूँटा लोरक रा ( लोरककी ओर टूँटाका आँख फाड़कर देखना ) आँखि फाड़ि क टूँटा धावा। लोर कहा हौँ खीन वै खावा ॥१ लोरक मागि चला सो डराइ। पन्थ टूँटा सुहि भसम कराइ ॥२