चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 336, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें३ ३
सम्बोधनका प्रयोग किया है। टाँड—साथवाह, कारवाँ, व्यापारी समूह। ढोर्से—'दिबसे' पाठ भी सम्भव है। (२) बार—बाल, पुत्र।
४०० (रीडिंग्स २८४) जवाब दादने नायक खोकिन रा कैफियते बनिज (नायकका खोकिमसे वणिजका वृत्तान्त कहना)
मैज मँजीठ चिरौंजि सुपारी। नरियर गोवा लौंग छुहारी ॥१ सौ दिक मँइहूँ कुँकूँ चलाषा। पतरज बरनहि गनति न बाषा॥२ पाट पटोर चीवर बहु भाँती। दिये मैं सहस सहस कै पाँती ॥३ हीर पटोर रूप बहुतायता। बेर्ना चन्दन अगर भर लायता ॥४ गोबर फा भौमन सिरजन नाऊँ। हरदीपाटन पुरुबहि बाऊँ ॥५ बरद सहस दस जापन, औ मेला यह आइ ।६ दखिन हुतैं भर लायता, पाटन मेलसि बाइ ॥७
टिप्पणी—(१) मैज—सम्भवतः मेनफल एक फल जो ओषधि के काम आता है। मंजीठ—एक फल जो औषधि के काम आता है; लाल रंग। नरियर—नारियल। गोवा—(सं गुवाक)—एक प्रकारकी सुपारी। छुहारी—छुहारा। (३) पाट पटोर—देखिये टिप्पणी ३२७। चीवर—वस्त्र। (४) हीर पटोर—देखिये टिप्पणी २८७। बेर्ना (सं बीरण)—खस। (५) भौमन—ब्राह्मण। (६) बरद—बैल।
४०१ (रीडिंग्स २४५: काफी) गिरियाकदने खोकिन व पाये सिरजन उफ्तादने मैना (खोकिमका रोना और मैनाका सिरजनके पैर पड़ना)
सुन पाग्न रोलिन सम राधा। नैन नीर¹ मुख धूड़ी² धाधा ॥१ मैना माइ पायँ लै परी। सिरजन पाँगु कहूँ एक घरी ॥२