भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४ नाँह मोर हाँ पारि पियारी । ल गइ चाँदा पाटन ताही ॥३ लोरक नाँउ सुरुझ कें करा। सेठ लैं चाँद पाटन धरा ॥४ मई सज सुरुझ चाँद लैं भागा। दूसर समो आइ अब लागा ॥५ सब दिन नैन जोवत पन्थ, औ निसि जागत आइ ।६ मोर संदेस लोर कहूँ, इहैं पर गेइ घड़ाइ ॥७ पाठान्तर—काशी प्रति— शीर्षक—दर पाव सिरजन उफ्तादन मैना व अहवाल गुफ्तन (सिरजनक पैरों पर गिरकर मैना का अपना हाल कहना) १—पेड़ैम । २—रकत । ३—झूठी । ४—छोरि । ५—चाँदा । ६— नैन जुवाई । ७—ओ सब निसि । ८—अन्तिम पद प्रतिमे मिट गया है । टिप्पणी—(१) कहूँ—कहीं । (३) नाँह—पति । पारि—पाला दुपटी । (४) करा—कजा । सेठ—उठे । (५) समो—समय । (६) जोवत--निहारते हुए । ४०२ ( रॉकण्डूल २८६ ) कैफियते माह सावन गुफ्तने मैना बर सिरजन बाँज दुखारी खुद (मैनाका सिरजनसे अपनी सावन मासकी अवस्था कहना ) साँवन मास नैन झर लाये । जखरन नाँह दिन एकौ पाये ॥१ बरसि भरे भुइँ खार खँदोला । मियें न छकै खीर अमोला ॥२ घरउ काजर चख रहे न पावा । खिन खिन मैना रोइ बहावा ॥३ सावन चाँद लोर लै भागी । मैना नैन पूर झर लागी ॥४ इहैं पर नैन जुवाई अरघानी । सरि गै झार ढोर तिहूँ पानी ॥५ जिह सावन सुरुझ गवनें, सो मैना धरत साग ।६ सिरजन कहहु लोरकौँ, माँवर फेर अभाग ॥७