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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२०५ ४०३ ( रीजेन्ड्स २८० ; बम्बई ४९ ) कैफियते माह भादों ( भादों मासकी अवस्था ) भादों मास निसि भइ' अँधियारी । रैन डरावन हौं घनि पारी ॥१ बिजुलि' चमक मोर हियग' भागै । मंदिर नाह बिनु अहि डहिलागै ॥२ संग न साथी न सखी सहेली । देखि फाटि हिय मंदिर अकेली' ॥३ तिहि दुख नैन फूटि निसि बहैं' । धरती पूरि सायर भर रहे ॥४ निफर चलतें पाँ' घली न जाइ । भुइँ' बूड़ि रहा थल छाइ ॥५ दुखत पचन स्रवन' कँ, लोर बिदेसहि' छाण्ड ।६ नीर लाइ नैन दुइ बरखा", सिरजन रोइ पहायठ ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—सफतो माह ग्वधों गुफ्तन मैना पेशे सिरजन पैगाम बजानिबे लोरक (सिरजन के आगे मैनाका अपनी भादों मासकी दुरवस्था कहना और लोरकके लिए संदेशा भेजना ) १—मादों बरत चमक । २—पंचम । ३—हीउर । ४—हाधि । ५—सहनी । ६—अपनी । ७—एहि दुख फूटि नैन छल । ८—पग । ९—भुमहि । १०—सर्वैन । ११—परबसहि । १२—लाइ नैन दुइँ वरखा । ४०४ ( रीजन्ड्स २८८क ) कैफियते माह कुआर ( कुआरकी अवस्था ) चढ़ा कुआर अगस्त घिताथा । नीर घट पै कन्त न आवा ॥१ फुल फांस हाँस सिर छाय । मागस दुरलाई खिडरिज आय ॥२ निरवा पार न अपुम्प पारी । अति रम भइ नाँइ पियारी ॥३ नव रितु लाग पितरपख होई । राइ राँक घर सीस रझाइ ॥४ ९

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