भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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९९ ४१० (अनुपलब्ध) ४११ ( रामपुर ) [ - - - - ] । [ - - - - ] ॥१ [ - - - ] । [ - - ] ॥२ [ - - ] । [ - - - - ] ॥३ कोइल जस फिरउँ सब रूखा । पिउ पिउ करत जीम मोर सूखा ॥४ मैनखंड विरिख रहा नहिं कोई । कवन डार जिंह लागि न रोई ॥५ एक घाट गइ हरदी, दूसर गई महोब ।६ ऊभ माँह के चाँदा नवह, कवन घाट हम होम ॥७ टिप्पणी—यह अंश पद्मावतकी प्रतीक आवरण पर उद्धरण रूप में अंकित है । इस कारण शीर्षक और प्रथम तीन पंक्तियाँ अप्राप्य हैं । ४१२ ( बम्बई ३८ ) हमे हाले खुद गुफ्तने मैना पीश सिरजन पैगाम बेजानिबे लोरक ( मैनाका सिरजनसे अपना हाल कहना और लोरकके पास सन्देश भेजना ) मैं मम दुख तुम्ह आगें रोवा । चाँद नाँह मुहि देहु बिछोवा ॥१ तैं हर पूनेउँ चाँद सपूनी । खगरितु फीनी सेज मोर छूनी ॥२ कहु सिरजन अस चाँद न कीजइ । नाँह मोर मुहि दुख ना दीजइ ॥३ एक परिस मुहि गा पिनु नाहाँ । दइ कै डर कीजइ चित माँहाँ ॥४ तिहुँ आदि तिरिया कै जाती । पिउ बिनु मरसी रैन हिय फाटी ॥५ हूँ र निसोंकी नारि, सोक मन माँहि बिगास ।६ (लीन्हें) सुरसि नाँह मोर, कस अपहूँ न ऑस ॥७ मूलपाठ—७—नीह (मूलका नुक्ता छूट जानेसे ही यह पाठ है) । टिप्पणी—(४) गा—बीत गया । (७) सुरसि—स्नेह ।