चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१ ४१३ ( बम्बई ५९ ) बाकये हाले खुद गुफ्तने मैना पेश सिरजन पैगाम बेदानिदे लोरक ( मैनाका सिरजनसे हाल कहना और लोरक के पास सन्देश भेजना ) काहे कँह बिधि हौ औतारी । गरु औतरतईं मरतिउँ भारी ॥१ चाँद मया कर दइ अहिबात् । मैंहि पारी सर ऊपर छातू ॥२ यह दुख मार सहै को वारी । तिहि निसि रोइ देवस महँ जारी ॥३ सोरहकरौं सरग परगाससि । बारह मदिर सेज तूँ बाससि ॥४ सहसकरौ सुरुज उनियारा । साईं मोर तिहि मयठ पियारा ॥५ पायें परतौं जो गवनसु, औ सिरजन पूछा सारठँ ।६ चारफरौँ जो परगासै, तासौं कैसें पारठँ ॥७ टिप्पणी-(१) औतारी—अवतार दिया; जन्म दिया । भरतिउ—मार डालते । वारी—कन्या । (२) अहिबात्—पति के जीवित होनेका सौभाग्य । (३) गवनसु—जाओ । ४१४ ( बम्बई ५२ ) ब शिकायत गुफ्तने मैना हाले खुद पेश सिरजन पैगाम बेदानिदे चाँदा ( चाँद के पास सन्देश भेजनेके लिये मैनाका सिरजनसे अपना हाल कहना ) मोर मढार सरग कै राषसि । औ निसि मंहि सर ऊपर भाषसि ॥१ बाँमन देठ लोग मंहि दीन्हा । सो तैं लोर सैल कै लीन्हा ॥२ तूँ बिनु साथ कानि तिहिं नाहीं । नँइ मोर गोपसि परछाँहीं ॥३ मुहि राखसि अपनें उजियारी । लोर रूसि पर पर अँधियारी ॥४ पावन पुहुप भा तोर बिबाहा । लोरक मोर गहसि दुहुँ काहाँ ॥५ सिरमन बिनबतौं चाँद कहूँ, पठहि लोर दिबाइ ।६ छोड़ि देहि पर आवइ, मैंहि दिय आस तुलाइ ॥७