भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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५१२ टिप्पणी—(१) राबसि—रम्य करती है । (२) बैल के सीन्हा—बैल बना दिया (मुहावरा) वशीभूत कर दिया । ४१५ ( बम्बई ५१ ) पाये तफ्तादने मैना बज बराये रसीदने पैगाम बेशा नियै लोरक ( लोरकके पास सन्देश ले जाने के निमित्त मैना का पाँव पड़ना ) सिरजन पाडर डैलें मैना । बनिज तुम्हार मोर दुख पैनाँ ॥१ लादि गोंड़ विंहि घरहु गुँसाईं । जिह पाटन गा लोरक सांईं ॥२ जिह पाटन गइ चाँद सुभागी । तिँह पाटन गवनहु महि लागी ॥३ जिह पाटन पिउ रहा लुभाई । लोभी चाँद न लै घर आई ॥४ तिँह पाटन लै बनिज पिसारा । औ बेसहैं कहँ लोर हँकारा ॥५ देतँ तुरी चढ़ि सिरजन, उदरै पवन पँख लाइ ।६ दस गुन लाभ देब मैं तोकइँ, लोर पेसाइँ जाइ ॥७ टिप्पणी—(१) बाडर—पागल । डैलै—डेलती है, डरती है भेजती है । बनिज— व्यापार सामग्री । (२) पाटन—पत्तन बन्दरगाह यहाँ तात्पर्य हरदीपाटनसे है । किन्तु 'बाटन' पाठ भी सम्भव है । उस अवस्था में अर्थ होगा—मार्ग । (३) गवनहु—गमन करो बाबा । महि लागी—मर निमित्त; मेरे निहारे । (५) बिसार—बिक्रय वस्तु । बेसइ—क्रयके निमित्त । (७) देब—दूँगी । तोकइँ—तुमको । ४१६ (रीफैण्ड्स २११ । बम्बई ७ ) गुफ्तन रोलिन सिरजन नायक रा व रवान कदन ( लोलिनका सिरजन नायकस कहना और उम भेजना ) रोलिन नायक दुन्हु कर गहा । आपुन पीर हियें कै कहा ॥१ रकत हाय अँधरी कँ लइ' । हाँ न लखत टेफ मार गयीं ॥२ पियर धूप अप नीथन मोरा । यह पछताठ रहसि तुम्ह लोरा ॥३