चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११२ मूइ मयसि खोलिन हुँभलानी⁶। तुम बिनु पूत खींधि को पानी ॥४ आइ देखु हों अँधवत माहा। भययें आइ करियहु फाहाँ ॥५ मोर जियतईं जो⁷ सिरजन, लोरक आइ दिखाठ ।६ नैन नीर छायर अति बहइ⁸, [घोइ⁹] पीठ¹⁰ दोइ पाठ ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—गुफ़्तन रोलिन वाक़या हाल खुद बदपी पैगाम बबानिब लोरक (रोलिनका अपने बुढ़ापेकी अवस्था कहकर लोरकके पास सन्देश भेजना) ॱस प्रति में पंक्ति १ ४ और ५ क्रमशः ४ ५ और १ हैं । १—रोलिन । २—कंसत छूटी अँधरी के गयी । ३—मुर ॱॱ । ४— यह । ५—पीह । ६—मूइ कयसि रोलिन डुँबजानी । ७—तिह । ८—अभये⁹ आइ करि पुनि फाहा । ९—मोहि जियत जिन । १०— नैन नीर भर छरकर । ११—पिकठै । ४१७ ( रीठींग्स २९ : बम्बई ३१ ) रवान शुदन सिरजन सूये हरदीपाटन ( सिरजनका हरदीपाटनकी ओर रवाना होना ) कवन बनिस तुम्ह¹ नायक कीन्हा²। सोक संताप बिरह दुख लीन्हा³॥१ दंड उदेग उधार बिसाहा। अब बैराग्य खपारे⁴ ओ आहा ॥२ अरथ हरष सब बाखर भरा⁵। पाखर कीन बिरह दुखँ बरा ॥३ महर दानौर सब दीं लागा। झार न सहैँ साथि सब भागा ॥४ मारग धर धै⁶ जरतै⁷ जाइ। मैना काम न आग⁸ बुझाइ ॥५ दानी माँगत दान महारथ, ओ बैठ बटपार⁹ ।६ कहत सुनत हाँ बाधे, सिरजन करहु उपकार ॥७ पाठान्तर—बम्बई प्रति— शीर्षक—पैगामे सिरक हासिल शुदने सिरजन रा व रवाँ कदन बजा गौवर बेजानिबे लोरक (बिरहका उपदेश लेकर सिरजनका गौवरसे लोरकके पास जाना) १—सुनु । २—कीन्हा । ३—दीन्हा । ४—अति अथवा उठ । ५— समाइ । ६—करनी मरन करनि सब भरा । ७—जर । ८—तहे ।