चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१४ १—मिरग फब कैसे जो आहीं। २—बरम (धूम) लिखिने 'वाव'को 'रे' की तरह लिखा है। ३—छार । ४—कितन। ५—उरि कोरना । ६—बिंदु तर आइ होइ मैंतारा। ७—सरवर। ८—मइस। — सागर। ९ —बरम (धूम) नैन भये कार। १०—तुह्यारें। टिप्पणी—(१) धूम—धूम्र काला । (२) काँधत—बाबत, जितने भी। पंखि—पक्षी। उरथि—उच्च आकाश। किसान—कुन्त। बरन—वर्ण रंग। करि—कराकर । (३) करिया—कर्णधार; पतवार संभालने वाला। नाउ—नाव । गुनचारा—रस्सी खींचकर किनारे लाने वाला नाविक। इस शब्दका प्रयोग पदमावत (१८।६) और मधुमालति (१५।१) में भी हुआ है; किन्तु दोनों ही स्थानोंपर माताप्रसाद गुप्तने इसे 'कंदहारा' पढ़ा है। गाफ (काफ) नून दाल (दाल) हे अन्वि रे, अलिफ़को 'कंदहारा' पढ लेना सहज है। किन्तु नौकाचलन सम्बन्धी शब्दावलीमे कन्दहारा जैसा कोई शब्द नहीं है। माताप्रसाद गुप्त और वासुदेव शरण अग बाल दोनोंने इस तथ्यसे परिचित न होनेके कारण इसे संस्कृतक कर्णधारक—कणधारका रूप मान लिया है। किन्तु कर्णधार (पतवार सम्भालनेवाले नाविक) के लिए करिया शब्द है। नौकाचलनमें नाविक तीन प्रकारके होते हैं—(१) डाँड चलानेवाले—इनका काम नावको डाँडके सहारे गति देना होता है। इन्हें खेवक या डाँडेया कहते हैं। (२) पतवार सम्हालनेवाला—इसका काम पानी काटकर आगे बढने तथा दिशा नियन्त्रित करनेके निमित्त पतवारका सञ्चालन करना होता है। इसे करिया कहते हैं। इन दोनों प्रकारके नाविकोंका काम जलके मध्यमें होता है। (३) रस्सीके सहारे नावको खींचकर किनारे लानेवाला नाविक। इसको गुनचार कहते हैं। बिना इसकी सहायताके नावका किनारे आना सम्भव नहीं। (४) सायर—सागर। मॅडि—मण्डक मछली। कैरवहा—एक पक्षी विशेष। अडडर—अडम्बर। (५) कहि—सब । ४१९ (दीर्घकूट १९१) रसीदन सिरकन दर शहरे बाउन व खुद रफ्तन दर मुलाकाते गोरख (सिरजनका पाटन नगरमें पहुँचकर गोरखस मिलने जाना) माँझ चार बति पाट पटाई। हरदीपाटन उतरा बाइ ॥१॥