चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७४ ४२१ ( रीश्दहूम ३ १ ) बरून आमदने लोरक व मुलाकात करदन बा सिरजन ( लोरकका बाहर आकर सिरजनसे भेंट करना ) लोर बचन सुनि पँवरि सिभारा । पँवरी बैरमन आइ जुहारा ॥१ पीरहि पीर सुनत आँधारी । बेर क्याइ तुम्ह रूपमरारी ॥२ विधि कल्यान पुछि भल पायहु । लउ आँधार सइस अरगामहु ॥३ अन्त गवर जग रास फरै सो । परै पियास खांडे अस ले जो ॥४ रूपवन्त धनवन्त सुलख्खन । सिरीवन्त जजमान विचख्खन ॥५ अमकें बहुतैं असीसा, पीर लोरकहिं दीन्हि ।६ पुन पतरैं चइ बैठउँ सिरजन, पोथि हाथ के लीन्हि ॥७ टिप्पणी—(१) बैरमन—ब्राह्मण । (२) पीर—(फारसी) ब्राह्मण । आँधारी—आया । (५) सुलख्खन—सुलक्षण । सिरीवन्त—श्रीमन्त । जजमान—यजमान । विचख्खन—विचक्षण । ४२२ ( रीश्दहूम ३ २ ) दीदने सिरजन ताल-ए-लोरक व तासीरे सितारगाने साद व नहस ( सिरजनका शुभ अशुभ ग्रहोंको देख कर लोरकका भाग्य बताना ) सेठ अन अवसि बलबारी । मख रासि तुम रूपमरारी ॥१ मेख बिरिख आर मिथुन मँजे । कर्क सिंह कन्या जो गुंजे ॥२ तुला बिरश्चिक धनु आइ सुलावइ । मकर कुम्भ गुन मीन सुनावई ॥३ मेख चँदर जनम पर आवा । विसरें घर सुरुज दिखरावा ॥४ नवमें घरें भय परकासू । सतमें मंगर आइ आबासू ॥५ चार नखत तुम्ह दाहिन, कहीं गुनति अति देखि ।६ मघर बुध विरस्पत, जनम चँदर बिसेसि ॥७