चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२ मात्र दाऊद लिखा है¹ और गजेटियरोंमें भी उनका उल्लेख इसी रूपमें हुआ है।² पर मुन्तखब-उत्-तवारीख में अब्दुलकादिर बदायूनीने उन्हें मौलाना दाऊद कहा है।³ बीकानेर प्रतिके आरम्भमें जो शीर्षक है उसमें भी वे मौलाना दाऊद दलमई कहे गये हैं। रीजेण्ट्स प्रतिमें भी उनका उल्लेख एक ज्ञानपर मौलाना दाऊदके रूपमें हुआ है। इन प्राचीन उल्लेखोंसे जान पड़ता है कि दाऊद मौलाना कहे जाते थे। आधुनिक कथनका कि वे मुल्ला थे किसी प्राचीन सूत्रसे समर्थन नहीं होता। हो सकता है आधुनिक लेखकोंने फारसी लिपिमें लिखे मौलाना शब्दको किसी लेखन-प्रमादके कारण मुल्ला पढ़ लिया हो। साथ ही इस सम्बन्धमें यह बात भी ध्यान देने की है चन्द्रायानकी परम्परामें लिखे गये प्रेमाख्यानक काव्योंके रचनाकारों यथा—कुतुबन, मंझन, जायसी आदि किसीके नामके आगे मुल्ला या मौलाना जैसी उपाधि नहीं पायी जाती। अतः यह सम्भावना भी कम नहीं है कि दाऊद भी मुल्ला और मौलाना दोनोंमेंसे एक भी न न होकर, कोरे मलिक दाऊद ही रहे हों। मुल्ला और मौलाना दोनों ही मलिकके रूपपाठ हो सकते हैं। ऐसा होना फारसी लिपिमें सहज है। पर जबतक इस बातके स्पष्ट प्रमाण न मिल जाँय, दाऊदको मौलाना दाऊद कहना ही उचित होगा। वे धर्मा- ध्यक्ष (मुल्ला) की अपेक्षा विद्वान (मौलाना) ही अधिक ध्यान पड़ते हैं। स्वकथनानुसार दाऊद शेख जैनदी (जैनुद्दीन)के शिष्य थे। अकबर कालीन शेख अब्दुलहक कृत अखबार-उल-अखयारके अनुसार दाऊदके गुरु शेख जैनुद्दीन 'चिराग-ए-दिल्ली'के नामसे प्रसिद्ध चिश्ती सन्त हजरत नसीरुद्दीन अवधीकी बड़ी बहन के बेटे थे। बहनके बेटे होनेके साथ ही साथ वे हजरत नसीरुद्दीनके शिष्य भी थे और खैर-उल-मजालिसके अनुसार उनके 'खादिमे खास' थे। हजरत नसीरुद्दीन अवधीके सम्बन्धमें तो कहनेकी आवश्यकता नहीं कि वे दिल्लीके सुप्रसिद्ध सन्त हजरत निजामुद्दीन औलियाके प्रमुख शिष्य और उत्तराधिकारी थे। इस प्रकार दाऊद चिश्ती सन्त परम्परा की विशेषाली प्रधान शाखाके सम्बन्ध रखते थे। काव्य दाऊद रचित प्रेमाख्यानक काव्यके नामके सम्बन्धमें अभी हालतक काफी भ्रम रहा है। मिश्रबन्धुने ग्रन्थका नामोल्लेख न करके केवल इतना ही कहा था कि उन्होंने नूरक-चन्दाकी कथा लिखी। हरिऔधने उन्हें नूरक और चन्दा नामक दो ग्रन्थोंका रचयिता बताया। गजेटियरों में दाऊदकी रचनाका नाम चन्दैनी और चन्द्रांनी दिया गया है। रामकुमार वर्मा ने इसका नाम चन्द्रायान या चन्दायत दिया है। मुन्तखब-उत्-तवारीख की जो मुद्रित प्रति और अंग्रेजी अनुवाद प्राप्त हैं उन दोनों १. पीछे देखिये अनुशीलन, पृ. २। २. वही पृ. ५। ३. वही पृ. ४। ४. पृष्ठ ६४ व ६५।