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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

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पृष्ठ 37

२१ ७७९ और ७८१में से कौनसी चन्दायनकी रचनाकी वास्तविक तिथि है, अभी कहना कठिन है। फारसी लिपिमें छ्यासीका एकासी अथवा एकासीका उन्यासी पढ़ा जाना सामान्य-सी बात है। उपलब्ध प्रतियाँ चन्दायनकी अब तक निम्नलिखित प्रतियाँ प्रकाशमें आयी हैं और वे सभी खण्डित हैं :— रीलेण्ड्स प्रति—यह प्रति मैनचेस्टर (इंग्लैंड) के जान रीलेण्ड्स पुस्त- कालयमें सुरक्षित है। इस प्रतिमें आदि और अन्तके कुछ अंश नहीं हैं। बीच-बीचसे भी कुछ पृष्ठ गायब हैं। ग्रन्थके खण्डित होनेके पश्चात् किसीने पृष्ठोंको एकत्र कर पृष्ठांकन किया है जिससे ग्रन्थके पूर्ण होनेका भ्रम होता है। नये पृष्ठांकनके अनुसार इस ग्रन्थके अन्तिम पत्रकी संख्या १२६ है पर बीचसे ८ पत्र—१७, १२१, २६ और २१९ २१६ गायब हैं। इस प्रकार इसमें केवल ११८ पत्र अर्थात् २३६ पृष्ठ हैं; इनमेंसे केवल १४९ पृष्ठोंपर ग्रन्थका आलेखन हुआ है। शेष पृष्ठोंपर पूरे आकारके रंगीन चित्र हैं जो भारतीय चित्रकलाके इतिहासकी दृष्टिसे अत्यन्त महत्त्वके हैं। यह प्रति फारसी लिपिमें लिखी गयी है और प्रत्येक पृष्ठमें सात पंक्तियोंमें एक कड़वक और उसके ऊपर दो पंक्तियोंमें फारसी भाषामें उसका शीर्षक अथवा सार है। बम्बई प्रति—इस प्रतिके केवल ६४ पृष्ठ उपलब्ध हैं जो बम्बईके प्रिंस आफ़ वेल्स संग्रहालयमें हैं। ये पृष्ठ भोपालसे प्राप्त हुए हैं इसलिए कुछ लोग इसे भोपाल प्रतिके नामसे भी अभिहित करते हैं। इस प्रतिके सभी पृष्ठोंके एक ओर चित्र और दूसरी ओर फारसी लिपिमें काव्यका आलेखन है। ये पृष्ठ बिना किसी क्रमके उपलब्ध हुए हैं और उनमें किसी प्रकारका पृष्ठांकन भी नहीं है। अतः इन पृष्ठोंमें कोई ऐसी सामग्री नहीं है जिसके सहारे इन पृष्ठोंको स्वतः क्रमबद्ध किया जा सके। प्रत्येक पृष्ठमें आठ पंक्तियोंमें एक कड़वक और सबसे ऊपर दो पंक्तियोंमें फारसी भाषामें उसका शीर्षक अथवा सार है। इस प्रतिमें कड़वकके तीसरे यमकको दो पंक्तियोंमें बाँटकर लिखा गया है। होफर पृष्ठ—मेसाचुसेट्स (संयुक्तराष्ट्र अमेरिका) निवासी भारतीय कलाके संग्राहक मारिस होफरके संग्रहमें इस ग्रन्थके दो पृष्ठ हैं। उन्हें देखनेसे जान पड़ता है कि वे मूलतः बम्बई प्रतिके पृष्ठ रहे होंगे जो किसी प्रकार बिखर गये। मनेरशरीफ प्रति—यह प्रति मनेरशरीफ (बिहार) के एक खानकाहसे पटना विश्वविद्यालयके इतिहासके प्राध्यापक सैयद हसन असकरीको प्राप्त हुई है और उन्हींके पास है। इस प्रतिमें १४ पृष्ठ हैं। यह प्रति भी फारसी लिपिमें लिखी गयी है। प्रत्येक पृष्ठमें ९ पंक्तियाँ हैं, जिनमेंसे ऊपरकी पंक्तिमें फारसी भाषामें शीर्षक है और शेष ८ पंक्तियोंमें एक कड़वक है। तीसरा यमक दो पंक्तियोंमें बाँटकर लिखा गया है। इस प्रतिको लिपिकार अत्यन्त असावधान जान पड़ता है।