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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३४ धनम आनेका कारण पूछा और जानना चाहा कि उसके हाथमें किसका चित्रपट है। उसपर अंकित नारी चित्रकी ओर राजाका चंचल चित्त आकृष्ट हो गया था। बागीने बताया-पश्चिम देशमें गोहारी नामक राज्य है। वहाँके राजाका नाम महरा है। उसका एक आमात्य है जिसका नाम बाबनबीर है। वह अत्यन्त बली है। उसकी वीरताके कारण ही राजा सुखपूर्वक राज करता है। उसकी पत्नी महराकी राजकुमारी परम रूपवती है। उसका नाम चन्द्राली है। उसके रूपकी चर्चा देश देशान्तर तक फैली हुई है। उसे देखनेके लिए दूर दूरसे राजा महाराजा गोहारी देशमें आते हैं। सब वैभव होते हुए भी चन्द्रालीका पति बाबनबीर कामाग्निसे बंचित है। जब भी बाबनबीर चन्द्रालीके पास जाता तो वह और उसकी सखियाँ उसकी बड़ी सेवा करतीं और काम भोगके लिए प्रेरित करतीं। किन्तु वह उस पर तनिक भी ध्यान नहीं देता। एक दिन चन्द्रालीकी धायने बाबनको अपनी पत्नीके साथ रात्रि गमनके लिए आवाहन किया। उस दिन बाबन आया और चन्द्रालीके साथ उसका सम्भाष भी हुआ। किन्तु उसने सारी रात्रि सोनेमें ही बिता दिया और सबेरा होते ही वह धनको चला गया। उसके चले जाने पर चन्द्राली विलाप करने लगी। उसने अपनी माँसे जाकर कहा कि अब वह एकाकिनी रहेगी। अगर उसे पुनः उसके पतिसे मिलानेका यत्न किया गया तो वह जहर खाकर जान दे देगी। फलतः उसकी माँने राजासे कहकर उसके लिए एक बहुत बड़ा भव्य सजाया महल बनवा दिया और उसकी देखरेखके लिए अनेक सुन्दरियों नियुक्त कर दीं। नये महलमें जानेसे पूर्व चन्द्राली अपनी सखियोंके साथ देवायतनमें गयी। वहाँ उसके रूपदर्शनके लिए छोटे बड़े सब एकत्र हुए। मैं भी उस दिन वहाँ समाधिस्थ बैठा था। उसके रूपको देखते ही मैं संशा हीन हो गया और तभी से मैं भ्रान्त होकर घूम रहा हूँ। तीन दिन की मूछाके बाद जब मुझे ध्यान हुआ तो मैंने लोगों से कहा कि देवी ने मुझे साक्षात दर्शन दिया है। यह सुनकर लोग हँसे और उन्होंने मुझे मूर्ख कहा। उन्होंने बताया कि जिसे मैंने देखा वह राजकुमारी चन्द्राली था। उसका ध्यान थिर सम्भ न जानकर मैंने इस चित्रपटको अपने साथ रख छोड़ा है। यहाँ आकर मैंने देखा कि आप उस रूपवतीसे मिलनेके अधिकारी हैं। चन्द्रालीके रूपकी कहानी सुनकर शाह हसन मिलनेको विकल हो उठा। पाही उस महराकी राजधानी में चलनेको सहमत हो गया। मन्ना तेशराकी गदी और टने सवार भार गोहारी अञ्चलमें पहुँचा। जब महराको शाहके आनेकी बात ज्ञात हुई तो उसने उसकी बड़ी आवभगत की और बहुत सी वस्तुएं भेंट कीं। गोहारी देशमें छ मास तक रहने पर भी शाहको चन्द्रालीके दर्शन न हुए। उसे ज्ञात हुआ कि पाहाणी एक दुर्लघ्य विजन स्थानमें रहती है। वहाँ परिन्देके पर तक भाग बनते हैं। सालमें दो बार राजा दशदिगन्त के नृपोंका निमन्त्रण करता है और उस अवसर पर चन्द्रालीको देखनके लिए दूर देशके राजा वहाँ आते हैं। जब यह अवसर आया और सब राजा