भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 373, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 373

३४१

उसने योगी वेश धारी सोरठो देखा । सोरठकी नजर बचानेके लिए उसने अपने गलेकी रत्नमाला तोड़ दी । सब रत्न गिरपर पड़े । सभी सखियाँ रत्न बटोरनेम लग गयीं और दोनों प्रेमी प्रेमिका एक टक एक दूसरेको निहारते रहे । जब सखियोंने रत्न उठाकर सिरोकर उसे दिया तो उन लेकर चन्द्राणी वहाँसे हट आयी और देवीकी पूजा कर घर गयी । शारन अब चन्द्राणीसे मिलनेका पूरा निश्चय कर लिया और चन्द्राणीक सुलभ महल तक पहुँचनेका उपाय सोचकर एक कमन्द बनवायी रातमें वह महलक पीठ आ पहुँचा । भार पहरेदारोंकी निगाह बचाकर उसने चन्द्राणीक महल पर कमन्द फेका । सखियाने तत्काल कमन्द उखाड़ दी । लेकिन सोर हताश नहीं हुआ । उसने पुनः कमन्द फेकी और कमन्द छतसे आकर अटक गयी । सखियोंने उसे फिर उखाड़ दिया । सोरन देवगणोंकी प्राथना करके तीसरी बार कमन्द फेकी और इस बार उसका नुकीला अंश छतमें जाकर पूरी तरहसे बैठ गया । यह देखकर कि सोरका पौरुष काम कर गया चन्द्राणीकी सखियोंने उसे हरानेकी दूसरी तरकीब सोची। उन्होंने एक ही तरहकी चार सेजें विछायीं । तीन सखियोंने चन्द्राणीके वस्त्र पहन लिये और पञ्चाङ्गोंको मोड़कर चारों चार शय्या पर सो गयीं । सोर जब ऊपर पहुँचा तो उसने वहाँ एक ही तरहकी शय्या पर एक ही तरह की वेशभूषामें चार युवतियोंको सोता पाया । वह सोचमें पड़ गया कि चन्द्राणीको कैसे पहचाना जाय । वह चारों सेजोंका ध्यानपूर्वक निरीक्षण करने लगा । उसने देखा कि कुमारोकी दीप्याके अधोभागका बन्धन तो पुराना है और शेषका नया । तत्काल वह चन्द्राणीकी दीप्या पहचान गया । सखियों अपना हार मानी गया देखकर उसकी परिचयामें लग गयीं । इस प्रकार सोर और चन्द्राणीका मिलन हुआ । दूसरे दिन उसी प्रकार सोर चन्द्राणीसे मिला । उस दिन चन्द्राणीने बताया कि उसका पति-सावनवीर कलसे लौटने वाला है । यदि उसे इस रहस्यका पता लग गया तो बिना मारे नहीं छोड़ेगा । चन्द्राणी यह कहकर विलाप करने लगी । सोर ने उसे धीरज बँधाया । कहा-डरने की कोई बात नहीं । सावनक आनेसे पहले ही मैं तुम्हें यहाँसे निकाल ले जाऊँगा । वह चन्द्राणीको महलसे निकाल लाया और रथ पर बैठाकर सारथी निष्कण्टके रथको बन मार्गसे ले चलनेको कहा ताकि सावनका पता न लग सके । सार और चन्द्राणीके भाग जानेका समाचार जब राजा-रानीको मिला तो वे विलाप करने लगे । सावनको जब ज्ञात हुआ कि सार उसकी पत्नीको भगा ले गया है तो वह क्रोध और अपमानसे क्षुब्ध होकर सेनाके साथ सार-चन्द्राणीकी झाड़में लगा । खोजते-खोजते उसने सार-चन्द्राणीको ढूँढ निकाला और सोरका धिक्कारते हुए उसने उस पर चोरीका दोष लगाया और युद्धके लिए ललकारा । सारने उत्तर दिया—