चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४८ हिन्दुस्तानके एक राजाके एक लड़की थी जिसका नाम मैना था । वह अत्यन्त रूपवती थी साथ ही पतिव्रता भी थी । उसका विवाह राज्यने लोरक नामक एक सुन्दर युवकसे कर दिया था । उससे मैनाका अत्यन्त घनिष्ट प्रेम था । लेकिन लोरकने राज- कुमारी मैनाको छोड़कर चाँद नामक एक अन्य सुन्दरीसे सम्बन्ध स्थापित कर लिया और मैनाको त्यागकर चाँदाके साथ किसी अन्य नगरको चला गया ! मैना पतिके वियोगमें व्यथित रहने लगी । इसी बीच मैनाके सौन्दर्यकी प्रशंसा सुनकर साधन नामक एक आचारभ्रष्ट आशिक मिजाज नौजवान मैनापर मुग्ध हो गया और रात दिन राजकुमारीके महलका चक्कर लगाने लगा । एक दिन अकस्मात् उसने मैनाको अपनी अट्टालिकापर खड़ा देख लिया । उसके सौन्दर्यको देखते ही वह मूर्च्छित हो गया । साधनने मैनाको प्राप्त करनेको एक बुढ़िया कुट्टनीको नियुक्त किया । वह धूर्त बुढ़िया एक दिन फूलोंका गुलदस्ता लेकर मैनाके पास पहुँची और मैनाके मनमें यह विश्वास पैदा कर दिया कि वह उसकी धाय है और उसने शैशवावस्थामें उसे दूध पिलाया था । जब उस धूताने देखा कि मैना उसके झांसेमें फँस गयी है तो उसने अपना काम आरम्भ किया । उसने मैनासे उसके दुःख दर्दका हाल-चाल पूछा । मैनाने उसे लोरकके प्रति अपनी विरहव्यथा कह सुनायी । यह सुनकर कुट्टनीने इस बातको लोरककी बेवफाई और गद्दारी बताकर मैनाको उसकी ओरसे विरक्त करनेकी चेष्टा की और सलाह दी कि वह किसी अन्य व्यक्तिसे प्रेम कर यौवनका आनन्द उठाये । यह भी कहा कि साधन तुम्हारा प्रेमी है वह तुम्हारी प्रेमाग्निमें जल रहा है । यदि लोरक चाँदाके साथ यौवनका आनन्द उठा रहा है तो तुम भी साधनको अपनाओ । किन्तु मैनाने लोरकके प्रेमको भुलाने और साधनसे प्रेम करनेकी सलाहको ठुकरा दिया । कुट्टनीने अपनी चेष्टा जारी रखी और एक साल तक प्रयत्न करती रही । प्रति मास चतुरी विशेषताओंको व्यक्त कर मैनाको कामोत्तेजित करनेकी चेष्टा करती और चाहती मैना साधनकी इच्छा पूरा करे । किन्तु मैना कुट्टनीकी बातोंमें नहीं आयी और एक साल बीत गया । इसी बीच अकस्मात लोरककी प्रेयसी चाँदाकी मृत्यु हो गयी और वह मैनाके पास पुनः वापस आ गया । दोनोंका फिर मिलन हुआ । इसीलीने अन्तमें अपनी इस कथाको ईश्वरीय प्रेम सम्बन्धी प्रतीक कहा है । उसके अनुसार लोरक ईश्वरका प्रतीक है जिससे प्रेम करना चाहिए; मैना मानवीय आत्मा है जो ईश्वरकी प्रेमी है साधन शैतान है जो ईश्वरके प्रेमसे आत्माको विरत कर देना चाहता है कुट्टनी मानवीय वासनाओंकी प्रतीक है जो इन्द्रओंकी ओर आकृष्ट करके शैतानके काम में सहायक होती है ।