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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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दो स्त्रियों थीं। एक स्त्री नीचे रहती थी और दूसरी कोठेपर रहती थी। एक दिन रातम जब सिपाही घरपर नहीं था, एक चोर घरमें घुसा। उसने जैसे ही सीढ़ीपर पैर रखा, आवाज हुई। दोनों स्त्रियोंने सुना, समझा उनका पति सौतके पास आ रहा है। दोनों निकल आयीं। अँधेरेमें उन्होंने चोरको ही पति समझ लिया। वस्तुतः ऊपर वालीने उसके सरके बाल पकड़ लिये और ऊपर खींचने लगी। नीचेवालीने चोरको ऊपर जाते देखा। वह उसका पैर पकड़ कर अपनी ओर खींचने लगी। इसी तरह खींचातानी हो ही रही थी कि सिपाही घर लौटा। उसने चोरको देखा और पकड़ लिया और बादशाहके सामने ले गया। वहाँपर चोरने बताया कि किस तरह दो औरतोंने अपना पति समझकर उसकी मरम्मत की है। सौत बहुत बुरी चीज है। यह एक म्यानमें दो तलवारकी तरह है। मैनाने कहा—माँ-बापका जो सुख मिलना चाहिए था, वह तो मुझे मिला ही नहीं। ससुरालमें भी और नदी को सुख दे। किस्मतम जो लिखा है वही होगा। अगर सूरज-चाँद भी मेरे सामने आयें तो वह लोरकके सामने तुच्छ हैं। तू सौतका डर दिखाती है। अगर सौत आये तो क्या हुई। चाँदा आकर भले ही कलह करे। मैं तो बाहर उसकी बड़ाई ही करूँगी। इस प्रकार मैना और दूतीमें निरन्तर विवाद चलता रहा। दूती मैनाको विच- लित करनेकी चेष्टा करती और मैना सतीत्वमे दृढ़ निष्ठा प्रकट करती। दोनों अपनी अपनी बात दृष्टान्त दे देकर कहतीं। इस प्रकार छ मास बीत गये और दूती मैना को डिगा न सकी। निदान हार मानकर वह राजाके पास लौट गयी और अपनी असमर्थता प्रकट की। राजाने उससे कहा कि तू एक बार फिर चल कर चेष्टा कर। आज आधी रातको स्वयं दूतीके साथ मैनाके घर पहुँचा और एक कोनेमें छिप रहा। दूती मैनाके पास फिर पहुँची और बोली—तेरी ममताके कारण ही मैं फिर लौट आयी हूँ। आज वह फिर उससे तरह तरहकी प्रलोभन भरी बात करने लगी। पर वह मैनाको डिगा न सकी। राजाने जब देखा कि मैनाका सतीत्व अडिग है तो वह बाहर निकल आया और बोला—तू मेरी माँ है मैं तेरा बेटा हूँ। पश्चात् उसने लोरकको बुला भेजा। चाँदाने जब सुना तो वह बहुत प्रसन्न हुई और दोनों वापस लौट आये। राजाने चाँदाका लोरकके साथ विवाह कर दिया। मैना यह देखकर बहुत प्रसन्न हुई और तीनों सुखपूर्वक रहने लगे। राजाने कुटनीका सिर मुंडाकर नगरसे निकाल बाहर किया।