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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१६५ ताकि ये सामानको पकड़े रहें। फिर सूर्यको साक्षी बनाकर गंगाको प्रणाम कर निवेदन किया—तुम मेरी हमारी माँ हो। बिना खवैयाके इनको पार लगा दो। उसका इतना कहना था कि टोकरी पानीमें हवाकेसमान उठने लगी और दूसरे किनारे जा पहुँची। सैबरू, हारिक और सियारजहरूल एक साथ नदी पार किया और फिर तीनों अगारिया की ओर चले। काटबा शहर पहुँच करके वे लोग थक गए। कुबेने सैबरूसे कहा—चलते चलते मेरे पैर थक गये हैं, कुछ भोजन कराओ। यहाँ शराबकी बारह भट्टियाँ चलती हैं। कुछ शराब भी लाओ। तद्नुसार सैबरू गया और एक कल्वारिनकी भट्टीसे शराब लाकर पिताको दे दिया। उसे चखकर वह प्रसन्न हो उठा और बोला—माह बिना नमक तो यह फीका लग रहा है। जाकर मांस भी लाओ। सैबरू मांस लाने चला। रास्तेमें उसे काटबारू राजाका बकरा दिखाइ पड़ा। सैबरू उसे पकड़ लाया और इसका उसने मांस तैयार किया। यह देखकर पच कुच काका मस्त हो गये तो बोले—जाकर किसी अहिरिनका चूल्हा लाओ जो अच्छी रसोई बनाय। सैबरू अहिरिन खोजने निकला। खोजते-खोजते उसे एक ऐसी चूली अहिरिन मिली, जिसके हाथका कर खाना भी लड़का पसन्द नहीं करत थे। उसका रूप ईश्वरने ऐसा बनाया था कि सैबरू उसे देखकर ही लौट आया। आकर यह बात उसने पिता से कही। सुनकर कुच बोला—अहीरुफ लड़का होकर तुम मुग्ध ही रहे। छोटी अवस्था न हो तुम्हें मान्त्रिक बना दिया पर अभी तक कुछ अक्ल न आयी। तुम उसे ही बुला लाओ। सैबरू उसे अनुनय करके ले आया और पास बैठाके उसे स्नान कराया फिर बरातूनी रियासीका एक दक्षिणी साड़ी निकालकर उसे पहनाया। तब उसने अन्न लाकर भोजन तैयार किया। तीनों आदमियोंने बढ़ प्रसन्न खाया। फिर खा पीकर हाथ-मुह धोकर चौसठ और पच कुबेने वही हाथ धोया और फिर उसने उस बुढ़ियाका हाथ लगा दिया। यह रानी रूठ राजाके दरबारमें पहुँची और फरियाद की कि कुबेने मेरी इज्जत नष्ट कर दी। राजा इसका विचार ही कर रहा था कि इतनेमें दुलारू आला अंदर बोला— में आज आपका बकरा मारकर खा गया। वह कह ही रहा था कि कल्वारिन आयी व बोली—जिन्होंने आपका बकरा मारकर खाया है उन्होंने मेरी शराब पी है और मुझको एक धायोभी नहीं दिया। यह सब सुनकर राजाने ढिंढोरा बजवा दिया कि जाकर प्रथम रातको उसका