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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३३३ और सूंडपर मुष्ट गिरने लगे। राजाको लेकर हाथी भागा। धक्का कुबेने आगे बढ़कर उसका रास्ता रोक दिया और राजाको नीचे खींच लिया और बाँधकर ले चला। जब यह सूचना महलमें पहुँची तो रानी बहुत घबड़ायी। किन्तु वह बड़ी चतुर और राजनीतिमें पारंगत थी। उसने तत्काल कुबेके नाम एक पत्र लिखकर निवेदन किया—मेरे सिंदूरकी रक्षा कीजिये। यदि आपको धनकी आवश्यकता हो तो वह मैं दूँगी। यदि आपकी आँख मेरे राज्यपर लगी हो तो मैं आपकी प्रजा भी बननेको तैयार हूँ। धावकने पत्र ले जाकर सबरूको दिया। संबरूने उसे पढ़कर पीछे लिख दिया— हमें न तो धनकी आवश्यकता है न राज्यकी। हम अपने भाईका विवाह करने जा रहे हैं। हमारे साथके लिए बारातीके रूपमें कुछ आदमी और बाजा भेज दें। पत्र पढ़कर रानीने तत्काल अपने राज्य भर में, जो चौसठ कोसमें विस्तृत था आदेश भेजा कि गाँवमें जितने भी बाजे और जवान हों वे सब तत्काल आवें। इस प्रकार जब सब जवान और बाजे आकर तैयार हो गये तो रानीने कुबेके पास कहला भेजा कि उन्हें अपनी बारातके लिए जितने बारातियोंकी आवश्यकता हो ले जाँय। सबरू और चितारू-ने एक ही उमरके रोएँ उठेवे हुए छप्पन हजार नवजवानोंको चुना और बाजोंने से केवल अस्सी जोड़े तुरही और पचास जोड़ा करताल लिये। पश्चात् राज्यको छोड़ दिया। बारात चली और सोनतीरे किनारे पहुँचकर उसने डेरा डाल दिया। सोनतीके तटका मल्लाह भीमल था। उसने पार उतारनेका सेवा माँगा। सबरूने उससे कहा— दूर दराज बारात जा रही है। सात नदी और चौसठ पहाड़ पार करना पड़ा है। रास्ते में ही सारा खर्च समाप्त हो गया। तुम सेवा उधार समझकर हमें पार उतार दो। हम जब ब्याह करके लौटेंगे तब चुका देंगे। भीमल बोला—आप सब चालाक मालूम होते हैं। बिना सेवा लिए मैं नहीं उतारूंगा। इतना सुनना था कि सबरूको क्रोध आ गया और उसने उसकी मुरेडी (फाँड़ी) छीनकर उसके दोनों हाथ पीछेकर बांध दिये। तब भीमल अनुनय करने लगा—मुझे छोड़ दीजिए। मैं आपकी सारी बारातको पार उतार दूँगा और आपसे एक छदाम भी न लूँगा। कसूर माफ हो। यह सुनकर सबरू हँसा और उसे छोड़ दिया और बोला—यदि एक नावसे तुम बारात पार करने लगोगे तो विवाहके सम्बन्ध समय तक हम लोग नहीं पहुँच सकेंगे। अगौआके लोग कहने लगेंगे कि छिछू लेनेक बाद डरकर विवाह नहीं करने आए। इसलिए जानतीव सभी घाटोंपर जितनी भी नाव हों उन्हें लाकर उनका पुल बना दो। हम लोग लड़े लड़े नदी पारकर जावेंगे। सबरूके कथनानुसार उसने घाटोंकी मल्लाहकी और उन्हें जोड़कर पुल खड़ाकर दिया और बारात पार हो गयी।