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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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किसी समय शिवभर नामक एक व्यक्ति रहता था जिसे पार्वती ने नपुंसक हो जानेका शाप दे दिया था। शाप देनेके कारणको बेगलरने बताना उचित न समझकर नहीं दिया है। पार्वतीका शाप पानेसे पूर्व बचपनमें ही उसका विवाह हो गया था। यथा समय जब उसकी पत्नी चन्दन युवती हुई तो उसका गोना हुआ और शिवभर अपनी पत्नीको अपने घर लिवा लाया। शिवभरके नपुंसक्त्वके कारण उसकी पत्नी उससे असन्तुष्ट रहने लगी। उसने अपने गाँवके ही एक व्यक्ति चोरीसे सम्बन्ध स्थापित कर लिया और उसके साथ घरसे भाग निकली। शिवभरने उसका पीछा किया और उन्हें जा पकड़ा। लेकिन उसकी पत्नीने उपहास करते हुए लौटनेसे इन- कार कर दिया। बोली—जब मैं तुम्हारे घर थी तब तो तुमने परवाह न की और अब मेरे पीछे बेकार भाग रहे हो। लेकिन शिवभरने उसकी एक न सुनी। फलतः शिवभर और चोरी दोनोम घोर युद्ध हुआ और शिवभर हार गया। चोरी और चन्दन आगे चले। बड़गाँवके निकट जहाँ एक मुण्डहीन मूर्ति पड़ी है गङ्गापतिया नामक जुआरियोंके सरदारसे उनकी भेंट हुई। वह जुआगार गाँवका रहनेवाला था। चोरीने उसके साथ जुआ खेलनेकी इच्छा प्रकट की और दोनों खेलने बैठ गये। जुएमें चोरीके पास जो कुछ था वह तो हार ही गया साथ ही चन्दनको भी हार गया। जब गङ्गापतिया चन्दनको पकड़ने बढा तो चन्दन बोली—मानती हूँ कि मैं दाँवपर लगायी गयी थी और मैं हारी गयी हूँ किन्तु मेरे तनपर जो आभूषण हैं, वे दाँवपर नहीं लगाये गये थे। अतः उन आभूषणोंके साथ अभी एक दाँव और खेलो। जुआरी खेलने बैठ गया। चन्दन अपने प्रेमी चोरीके पीछे और जुआरीके सामने जुआ देखनेके बहाने जा खड़ी हुई। खेल देखनेमें लीन होनेका बहाना करते हुए उसने अपनेको इस ढंगसे विवस्त्र कर दिया मानों वह अनजाने अकस्मात् हो गया हो। जुआरी उसके रूप सौन्दर्यपर इस प्रकार मुग्ध हुआ कि उसकी ओरसे उसकी आँख हटती ही न थीं। फलतः वह हारने लगा। चोरीने न केवल अपना सब हारा हुआ धन जीत लिया वरन् उसके पास और जो कुछ भी था वह भी ले लिया। अन्तमें हार मानकर जुआरीने खेलना बन्द कर दिया। तब चन्दनने सामने आकर चोरीसे अपनी कारवाई कह सुनाइ और बताया कि जिस तरह वह उसे कञ्जाई औरतोंसे खेल रहा था। अन्तमें बोली कि इस दुष्टको मार डालो ताकि वह डींग न हाँक सके कि उसने मुझे विवस्त्र देखा है। चोरी बड़ा बली था। उसकी तलवार दो मनकी थी और उसका नाम था विज्ञाधर। एक ही झटकेमें उसने जुआरीका सर अलग कर दिया जो जुआगारमें जा गिरा और धड़ जहाँ वह बैठा था वहीं पाषाणयी हो गया। तबसे वहीं उसके शरीरके दोनों भाग पत्थर बने पड़े हैं। चोरी कुर्यरकटई नामक आकेरा नटका था। उसका विवाह भगोरी गाँव की जिसे अब रजोकी कहते हैं और वह हजारीबागसे बिहार जानेवाली सड़कपर स्थित