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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१९६ लोरिकने कहा—उसकी व्यवस्था मैं कल कर दूंगा। आज खेल लेने दो। यह सुनकर मीमरुने रजईसे कहा—न जाने कहाँका मूर्ख आकर मजाक कर रहा है। उसे धक्का देकर निकाल बाहर करो। यह सुनकर रजई लोरिकके पास आया और उससे भिड़ गया। पर वह लोरिकका कुछ न बिगाड़ सका। तब दूसरे मल्लाखिये भी आ जुटे पर लोरिकने उनको झटक दिया। अन्तमें मीमरु स्वयं लोरिकसे आ भिड़ा। उसे भी लोरिकने देखते-देखते परास्त कर दिया। यह देखकर जो लोग वहाँ थे वे भागकर हरदी पहुँचे और जाकर सारा हाल राजासे कहा। राजाने यह सुनकर अपनी सारा सेनाको तत्काल तैयार होनेका आदेश दिया। जब चन्दाने राजाको सेना लेकर आते देखा तो स्वयं भी अपनी सखियोंके साथ नदी के किनारे पहुँची और राजाको न मारनेका जो वचन लोरिकने दिया था उसे दिला- कर पीछे वापस ले जानेको प्रेरित किया और साथ ही लोरिकके क्रोधको भी शान्त किया। उस समय तो राजा वापस लौट आया। मगर लोरिकका हरदीमें रहना अपने लिए खतरेसे खाली न देख मन्त्रीसे कोई ऐसा उपाय करनेको कहा जिससे यह शत्रु सहज ही ढक जाय। यह सुनकर मन्त्रीने कहा—इसका सीधा उपाय है। हर साल नेठरपुरका हरेश भुताहा हरदी आता है और कई मासकी एकत्र की गयी सामग्री एक ही दिनमें समाप्त कर देता है और उससे सारे हरदीवासी परेशान हो उठते हैं। अतः इसे उसीके पास भेज देना चाहिए। उससे कहा जाय कि हरेशने नेठरपुरमें म्नेह राजकुमारको बन्दी कर रखा है। उसे छुड़ा लाओ। इस योजनाके अनुसार लोरिकसे नेठरपुर जानेको कहा गया। लोरिक घोड़ेपर सवार होकर नेठरपुर पहुँचा। आगेकी कथा उपलब्ध न हो सकी। जे डी बेगलरने अपने १८७१-१८७३ ई के पुरातत्त्वान्वेषण यात्राके विवरणमें बड़ागाँव (जिला शाहाबाद बिहार) के प्रसंगमें लोरिक-चन्दाकी कथा संक्षिप्त रूपमें दी है।१ उसमें आरम्भिक कथाओं यथा—लोरिकका जन्म, मंजरीके विवाह आदिकी कथा नहीं है। उन्होंने केवल लोरिक चन्दाके प्रेमकी कथा दी है। उसमें नेठरपुरवाली कथा भी नहीं है; फिर भी उससे कथाके अन्तका कुछ आभास मिलता है। बेगलरवाले रूपको डब्ल्यू. क्रूकने अपनी पुस्तक पापुलर रेलिजन एण्ड फोक लोर आफ नार्थनं इण्डियामें२ और वेरियर एलविनने फोकलोर आफ छत्तीसगढ़ में३ लगभग अविकल रूपमें उद्धृत किया है। वहींसे यह हिन्दीके कतिपय ग्रन्थोंमें भी उद्धृत हुई है। उसके अनुसार कथा इस प्रकार है :— १ आर्कोलाजिकल सर्वे रिपोर्ट १. ८-७ पृष्ठ ८ पृ. ७९-८ । २ खण्ड १,पृ ११७-१६१ ३ पृ ३१ ।