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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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है, एक लड़कीसे हुआ था। किन्तु उसकी पत्नी छठमैना अभी बच्ची थी और उसका गौना नहीं हुआ था। उसके एक बहन थी, जिसका नाम छुरी था। गोरीके एक भाई था जिसका नाम सेमरू था। अनाथ होनेके कारण उसे गोरीके पिताने अपने बेटेकी तरह पाला था। वह अगोरीके पास ही पाली नामक गाँवमें रहता था। गोरी और चन्देन दोनों हरहुंग पहुँचे। मुँगेरसे उत्तर वह जो बिजुकी मस्जिदपर स्थित था। उन्होंने वहाँके राजाको हराकर देश जीत लिए। हारे हुए राजाने कलिंगके राजासे सहायता ली और गोरीको गिरफ्तारकर एक कोठरीमें बन्द कर दिया। वहाँ उसे बिठाकर उसके हाथ-पैरोंमें कील ठोंक दिये गये और उसके छातीपर भारी सील रख दिया गया। इस तरह वहाँ वह बहुत दिनोंतक पड़ा रहा। अन्तमे आराधना करनेपर दुर्गा प्रसन्न हुईं और उसे छुटकारा मिला। छूटनेके बाद उसने राजासे फिर लड़ाई की और हरहुंगको जीत लिया और चन्देनसे उसका मिलन हुआ। वहाँ उनके एक पुत्र उत्पन्न हुआ और वे वहाँ बहुत दिनोंतक रहते रहे। एक दिन उनके मनमें स्वदेश लौटनेकी इच्छा जाग्रत हुई और वे बहुत सा धन लेकर पाली लौट आये। इस बीच उसके पोष्य भ्राता सेमरूको लोगोंने मारकर उसकी गायें और धन- दौलत लूट लिया था। उसके एक लड़का था। उसका परिवार बड़े कष्टसे जीवन बिता रहा था। गोरीकी पत्नी भी सयानी होकर सुन्दर युवती हो गयी थी और अपने मायकेमें ही कष्टके जीवन बिता रही थी। गोरीने पहुँचकर प्रचार किया कि दूर देशका एक राजा आया है। रूप इतना बदल गया था कि कोई उसे पहचान न सका। इस प्रकार अपनेको छिपाकर उसने अपनी पत्नीके सतीत्वकी परीक्षा लेनेका निश्चय किया। फलतः यह जानकर कि उसके शिविरमें दूध बेचने आनेवाली स्त्रियोंमें उसकी पत्नी भी है और उसे पहचानकर (उसकी पत्नीने उसे नहीं पहचाना) उसने अपने शिविर आनेके मार्गमें एक धोती फैला दी ताकि कोई भी उसे रौंदे बिना न आ सके। दूसरे दिन प्रातःकाल, जब औरतें दूध बेचने आयीं तो उसने अपनी पत्नी (चन्देन) से कहा कि उनसे लपककर आनेको कहे। छठमैना चन्देनके कहनेपर थोड़ीतक तो तेजीसे आयी मगर वहाँ आकर वह रुक गयी। दूसरी औरतें उसपर चलती चली गयीं। छठमैनाने धोतीको रौंदकर आनेके सिवा कोई रास्ता न देखकर धोती हटा देनेके लिए कहा। यह देखकर गोरी बहुत प्रसन्न हुआ। जब वह दूध बेच चुकी और दाम माँगने लगी तो गोरीने उसकी टोकरीम जवाहरात रखकर चावलसे ढक दिया। बिना किसी प्रकार सन्देह किये वह लेकर चली गयी। घरपर उसकी बहनने टोकरी खाली करते हुए उन जवाहरातोंको देखा और अनुमान किया कि उसने उन्हें दुराचार द्वारा प्राप्त किया है। तदनुसार वह छठमैनापर आरोप करने लगी। छठमैनाने जवाहरातोंके प्रति अपनी अनभिज्ञता प्रकट की। अन्तमें दोनोंने सन्देह दूर करनेके लिए एक साथ जानेका निश्चय किया। दूसरे दिन वे दोनों साथ गयीं। छुरीने गोरीको पहचान लिया और तब वास्तविकता प्रकट हो