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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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ऊपर बरामदेसे चम्पाने रस्सीका पल्ला नीचे गिराया ताकि लोरि उसके सहारे ऊपर आ जाय। लेकिन जब लोरि रस्सी पकड़ने जाता, चम्पा रस्सी खींच लेती। इस प्रकार कुछ देरतक चम्पा हँस-हँसकर मनोविनोद करती रही। जब उसने देखा कि लोरि परेशान हो गया तो उसने रस्सी खींचना बन्द कर दिया और वह उसके सहारे ऊपर चढ़कर बरामदेमें पहुँचा। उसे देखते ही चम्पा कमरेमें छिप गयी। लोरि बड़ी देरतक उसे ढूँढता रहा। अन्तमें जब उसने चम्पाको ढूँढ़ लिया तो दोनों रातभर सहवास करते रहे। सुबहको जब लोरि जागा तो जल्दीमें उसने पपलीरी वस्त्र कण्ठाभरण पछोर (दुपट्टा) उठाकर सिरपर लपेट लिया और रस्सीके सहारे नीचे उतर आया और फिर विभिन्न ज्योतियोंके पहरेदारोंको भेंट देता हुआ अपने घर लौट आया। इतनेमें बरेठिन (धोबिन) जो चम्पाके कपड़े धोती थी, लोरिके घर गयी। वहाँ उसने चम्पाके वस्त्र पछोरको देखकर पहचान लिया और दोनोंके प्रेमकी बात जान गयी। वहाँसे वह चम्पाका वस्त्रपछोर ले आयी और चम्पाको देकर लोरिकी पगड़ी ले गयी। उस दिनसे वह उन दोनोंके बीच दूतीका काम करने लगी। इस तरह दोनोंका प्रणय सम्बन्ध बहुत दिनोंतक चलता रहा। अन्तमें दोनोंने अपना देश छोड़कर दूसरी जगह भाग जानेका निश्चय किया। और एक दिन दोनों घरसे निकल पड़े। गाँवके बाहर पदहान (गोठारू) था। यहाँ चम्पाका मामा रहता था। उसने लोरि और चम्पाको तीन दिनतक बड़े आरामसे रखा और उन्हें घर लौट जानेको समझाता रहा। पर वे न माने और वहाँसे चल पड़े। चलकर एक जंगलमें पहुँचे। उस जंगलमें एक महल था जिसमें खाने-पीनेका बहुत सा सामान और बहुतसे नौकर- चाकर थे। वे दोनों उस महलमें घुस गये और भीतरसे चारो ओरके दरवाजे बन्द कर लिये। वहाँ वे सुखपूर्वक रहने लगे। उधर जब बावनबीर आया तो चम्पाको न पाकर हैरान रह गया। पीछे जब उसे अपने धागेसे पता चला कि वह लोरिके संग भाग गयी है तो वह उसे ढूँढ़ने निकला और उस जंगलमें पहुँचा, जहाँ वे दोनों प्रेमी रह रहे थे। जब उसे मालूम कि वे दोनों उस महलके भीतर हैं तो उसने दरवाजेको तोड़ने-खुलवानेकी बहुत कोशिशकी पर सफल न हो सका, अन्ततोगत्वा निराश होकर लौट आया। एस० सी० दुबेने 'फील्ड सॉंग्स आफ छत्तीसगढ़' में इस कथाको एक अन्य रूपमें प्रस्तुत किया है।¹ इसके अनुसार चन्दैनी लोरिककी ओर उसकी वंशीकी ध्वनि सुनकर आकृष्ट होती है। वह लोरिकको बताती है कि महादेवके शापसे उसका पति निकम्मा हो गया है। वह लोरिकसे तृण छानेका अनुरोध करती है। तब वह उससे पान माँगता है। तृण छानाते समय जब तृण उसकी ओर आता है, १. पृष्ठ ४१-८।