चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 47, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें३ बम्बई प्रति—८५ ८६ ११० १२१ १२४, १२५, १३१ १६२, १६६, १७०, १८२, १९५, २६ २६२, २६ २७१, २९६ ३१६, ३२६ ३४३ ३४६ ३६७, ३९९ ४०३ ४ ७ ४ ६ ४१६ ४१७ ४१८ ४२४ ४२५ ४२७ ४२८, ४३ ४३१ ४४१ ४४६ ४४७ ४४८ ४५२ । कुल ४ मनेर शरीफ प्रति—१८१, २१ १९१ २१४, २९७ २९७ १ ४, ३ ५, ३ ७ १ ८ १ ६, ३११ ३१२ ३१३ ३१४, ३१५ ३१६, ३२३ ३२४, ३२५, ३२६, ३३९ ३४८ ३५१ ३५२ ४५१, १५४, १५५ १५६ १५७ १५८ ३६ । कुल ३२ पंजाब प्रति—२१ ८८ ९१ ९४ १५८ २ ५ २ ६, १६७, २६९ २७ । कुल ९ काशी प्रति—१ ६, १४७ २ २ २४, १४९ । कुल ५ होपर पृष्ठ—४४४ । कुल १ इन कड़वकों के सम्बन्ध में भी हमारे सम्मुख कोई वैज्ञानिक माप-दण्ड (क्रिटिकल ऐपरेटस) नहीं है जिससे हम संयुक्त-पाठका निश्चय करें। केवल एक ही बात निश्चित है कि उनके पाठ रीजेण्ड्स प्रतिके पाठसे भिन्न हैं। रीजेण्ड्स और दूसरी प्रतिके पाठों मेंसे कौन सा हम स्वीकार करें यह हमारे विवेकका प्रश्न रहता है। अतः हमें अधिक उचित जान पड़ा कि जब २९२ कड़वकोंके पाठ किसी एक प्रतिके हैं और अधिकांशतः रीजेण्ड्स प्रतिके ही हैं तो इन कड़वकोंके लिए भी रीजेण्ड्स प्रति के ही पाठ स्वीकार किये जायें और दूसरी प्रतियोंके पाठ विकल्प रूपमें दे दिए जाँय; मूल अथवा शुद्ध पाठका निर्णय पाठक पर छोड़ दिया जाय। केवल १२ कड़वक ऐसे हैं, जिनके पाठ तीन प्रतियोंमें अर्थात् रीजेण्ड्स और बम्बई प्रतियोंके अतिरिक्त किसी एक अन्य प्रतिमें हैं। ये कड़वक इस प्रकार हैं:— रीजेण्ड्स बम्बई और पंजाब प्रतियाँ—१५९ १९ । कुल १ रीजेण्ड्स बम्बई और मनेरशरीफ प्रतियाँ—११६ ३२२ ३२८ ३२९ ३४० ३४१ ३५ १५ ३५१ । कुल ९ रीजेण्ड्स बम्बई और काशी प्रतियाँ—४ ७ । कुल १ इन कड़वकोंके परीक्षणसे ज्ञात होता है कि (१) रीजेण्ड्स और पंजाब प्रतियोंमें (२) बम्बई और मनेरशरीफ प्रतियोंमें और (३) बम्बई और काशी प्रतियोंमें परस्पर पाठ साम्यकी बहुलता है। ऐसा जान पड़ता है कि रीजेण्ड्स और पंजाब प्रतियाँ एक प्रति परम्पराकी दो शाखाएं हैं और बम्बई, मनेर शरीफ और काशी प्रतियाँ दूसरी परम्पराकी तीन शाखाएं हैं। इन दोनों परम्पराओंका सम्बन्ध इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:—