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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३२ सम्मुख नहीं देख सकते कि चन्दायनकी रचना न तो अवधी वातावरणमें हुई थी और न उसका आरम्भिक प्रचार अवधी क्षेत्रके बीच था। अब्दुलकादिर बदायूनीने स्पष्ट शब्दोंमें कहा कि चन्दायन दिल्ली सल्तनतके प्रधान मन्त्री जौनाशाहके सम्मानमें रचा गया था और दिल्लीमें मखदूम शेख तकीउद्दीन रब्बानी जन-समाजके बीच उसका पाठ किया करते थे। यह कथन इस बातकी ओर संकेत करता है कि चन्दायनकी भाषा वह ग्राह्य है जिसे दिल्लीके प्रधान मन्त्री जौनाशाहसे लेकर दिल्लीकी सामान्य जनतातक पढ़ और समझ सकती थी। अब्दुलकादिर बदायूनीने इस भाषाके सम्बन्धमें हमें अपनी कल्पनाका कोई अवसर नहीं दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दोंमें बता दिया है कि इस मसनवी (चन्दायन) की भाषा हिन्दवी है। यह हिन्दवी निश्चय ही वही हिन्दवी होगी, जिसका प्रयोग चिश्ती सन्त शेख फरीदुद्दीन गंजशकर और ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया अपने मुरीदों- से बातचीत करते समय किया करते थे। उसी हिन्दवी को जो दिल्लीके सूफी सम्प्रदाय के सन्तों द्वारा व्यवहृत होती थी और राजसभासे लेकर जन साधारणमें समझी जाती अथवा कह सकती थी दाऊद ने अपने काव्य चन्दायनके लिए अपनाया होगा और उसीमें उसकी रचना की होगी। अतः चन्दायनकी भाषाको अवधके सीमित प्रदेशमें ही बोली और समझी जानेवाली भाषा अवधीका नाम नहीं दिया जा सकता। चन्दायनमें प्रयुक्त भाषा निस्सन्देह ऐसी भाषाका स्वरूप है जिसका देशमें काफी विस्तार और विकास रहा होगा। किन्तु खेद है कि हमारे सम्मुख तत्कालीन जनजीवनके व्यवहारमें आनेवाली भाषाका कोई स्पष्ट स्वरूप नहीं है जिसके आधारपर अधिक विस्तार और विचारके साथ इस कथनकी समीक्षा की जा सके। बारहवीं शताब्दीमें काशीमें रचा गया उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण नामक एक व्याकरण ग्रन्थ प्रकाशमें आया है जिसमें एक प्रादेशिक भाषाके स्वरूपको संस्कृतके माध्यमसे समझानेकी चेष्टा की गयी है। इस भाषाकी पहचान सुनीतिकुमार चाटुर्ज्याने आरम्भिक पूर्वी हिन्दी अर्थात् कोसली (अवधी) के रूपमें की है। यदि चन्दायनकी भाषा वस्तुतः अवधी है, जैसी कि विद्वानोंकी साधारणतया धारणा है, तो उसके शब्दोंकी उक्ति-व्यक्ति-प्रकरणके शब्द-रूपोंके साथ नैकट्य और साम्य होना चाहिये। इस प्रकारकी तुलनात्मक परीक्षाके लिए दोनों ग्रन्थोंके क्रिया रूपोंको देखना उचित होगा। वर्तमानकालिक क्रियाओंमें सामान्य वर्तमानके निम्नलिखित कर्तृवाच्य रूप उक्ति-व्यक्ति-प्रकरणमें मिलते हैं। एकवचन बहुवचन प्रथम पुरुष करउ करहु मध्यम पुरुष करसि करहु उत्तम पुरुष कर, करइ करवि