चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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चन्दायनमें प्रथम और मध्यम पुरुषकी वर्तमानकालिक क्रियाओंका प्रयोग कम है। उत्तम पुरुषके रूप जो हैं, वे उपर्युक्त रूपोंसे सर्वथा भिन्न हैं। यथा—आवाहौं, चढ़ावहौं, बहिराहौं, लायौं, कहाहौं, करहौं, सुहावइ, आवइ, भावइ आदि। उक्ति-व्यक्ति-प्रकरणके वर्तमानकालिक क्रियाके कर्मवाच्य रूप हैं—पड़िय, जेविअ, होइअ, पाइअ आदि। चन्दायनमें इसका रूप खेतस, चेतस आदि है। उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण की वर्तमानकालिक विधि-क्रियाएँ उकारान्त हैं। यथा—करु, करहु। चन्दायनम इस प्रकारकी वर्तमानकालिक विधि-क्रियाओंका सर्वथा अभाव है। भूतकालिक क्रियाएँ उक्ति-व्यक्ति-प्रकरणमें अत्यल्प हैं। जो हैं, उनके आधार पर सुनीतिकुमार चाटुर्ज्याने अकर्मक क्रियाओंके निम्नलिखित रूप स्थिर किये हैं :— \quad\quad एकवचन \quad\quad\quad\quad\quad\quad बहुवचन \quad\quad गा \quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad गये \quad\quad भा, भई \quad\quad\quad\quad\quad\quad भये, भई \quad\quad बाढ़ा \quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad बाढ़े \quad\quad आ \quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad\quad आये चन्दायनमें अकर्मक भूतकालिक क्रियाओंके अनन्त रूप मिलते हैं। यथा— परसि भा, आवा, बुलावा, पड़ावा, कहा, चढ़ा छाझौ, बाज्या, लग्गो, सीन्हो भई, प्रकटी, बानी, बखानी, पठाई, दीन्ह, कीन्ह, लीन्ह, भये, बैठे, बीठे, सुनाये, उठाये, गये भयो। उक्ति-व्यक्ति-प्रकरणमें भूतकालिक सकर्मक क्रियाओंके रूप हैं— कियेसि, दहेसि, पावेसि। चन्दायनमें इसके रूप हैं विवावा भरावा, हँकरावा। यथा— केक दधि दूध परघ विवावा सीप सिधोरा माँग भरावा पाहनराय बोर हँकरावा उक्ति-व्यक्ति-प्रकरणकी भविष्यत्कालिक अकर्मक क्रियाओंक रूप हैं— करिहौं, करिहसि, करिह, करिहति। चन्दायनम हमें निम्नलिखित ढंगके प्रयोग मिलते हैं:—