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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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८ पंक्ति मुद्रित उचित पंक्ति मुद्रित उचित १२।१४ दख देख ३ ५।२ बिधाता विधाता १३५।२ बिजैसेन बिजैसेन ३ ७।६ बगौँ क्यगौँ १३८।१ देंष बेट ११६।२ पुरुष पुस्त १८४।६ जँबरधर जँबरधार ३१६।७ शार बारि १४४।४ पिटोरे पिटोरी ३२६।६ बार बारि १४५।१ शरह शिरह ३२६।१ बटि काटि १८१।६ परम परब ३२२।४ अडनारइँ जेडनारइँ १५५।१ टिटहरी बिटिटिहरी ३२३।६ धरइँ भरइँ १५६।२ मूंज भूंज १५८।२ गबडि गारुडि १५७।१ पनि पानि ३६१।६ नौर शर १६ १४ याण दाण ३६ १४ के कै १०२।६ कथा कजा ३६२।२।४ काडे छाडे २ १।१ शौर शोर ३६२।२।४ जमकाय झमकाय २ ७।२ क्यमक बगमक ३६२।२।७ ननहिँ नरहिँ २ १६ सीह-सिंदूर सीँह सिंधूर ३६२।२।४ रमक रंग २ ५।७ नियारँग नितारँग ३६९।२।४ नान बान ९ ३।२ बैनौँ बनौँ ३६२।२।५ फर घर २ १।१ बाना बाजा ३६२।२। मान मान २ १।७ बास सास ३७७।३ नौर शर २ ८।५ रूंधि सूनि ९६।५ मम ससुल २४१।१ माथ माठ ४ १२ मैन सैन ४८।७ रात हात ४ ५।७ देष उठान डड उठान २५१।१ दव दउ ४१७७२ रव दम्ह २६०।२ दर्डाँगी पर्डाँगी ४१.J दारा डारा ७ । दष डष दंड ४२/१८ कद्यारि फद्यारी ७ ७ मूं मूंठि ४२६।१ मि मरुझ । मंति मति ४८०। नादिर खदिउ १० मेघराग नेधिराग ४४८। नौर शर उपर्युक्त बात पर्यन्त उत्तर साथ भी मैं कहना चाहूँगा कि उच्चारण मैथिल लिपि तथा भाट अन्तराचार कारण अनेक शब्दों के समझने में अवश्य भूल हुई होगी। यदि पाठक जन या पाठकों की दृष्टि आप जाय व उन्हें स्पष्ट और पहचान पावे तो उनकी सूचना मैं उनकी उदारता अवश्य गिनाय। किसी प्राचीन ग्रन्था मध्य शोधन करना बड़ा ही दुर्भर और श्रमसाध्य सा काम ही मेरी समझ में है।