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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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कवि-परिचय मौलाना दाऊदका परिचय देते हुए मैंने कल्पना अंक १२४ (पृ० १७)में लिखा था—तवारीख़-ए-मुबारक शाहीमें एक शेख़ बाछकका उल्लेख है जिन्हें खानजहाँके निजी मौलानाका पुत्र (मौलानाजादा) कहा गया है। खानजहाँने फीरोज़ शाहको अपने विरुद्ध भारी सेना लेकर आते देखकर इन्हें कुछ लोगोंके साथ शाहको सन्तुष्ट करनेके लिए भेजा था। अधिक सम्भावना इस बातकी है कि शेख़ बाछक अन्य न होकर यही मौलाना दाऊद थे। यदि हमारा यह अनुमान ठीक है तो मानना होगा कि दाऊद खानजहाँके कृपा पात्र ही नहीं अत्यन्त विश्वास पात्र भी थे। पीछे ज्ञात हुआ कि यहाँ जिस खानजहाँका उल्लेख है वह खानजहाँ मक़बूल अथवा खानजहाँ जौनाशाह न होकर एक तीसरे खानजहाँ अहमद अयाज़ थे जो मुहम्मद तुगलक़की मृत्युके समय दिल्लीमें उनके नायब थे। उन्होंने फीरोज़शाह तुगलकके विरुद्ध एक अज्ञात कुलीन लड़केको मुहम्मद तुगलकका बेटा घोषितकर गद्दीपर बैठा दिया था। तत्पर जब फीरोज तुगलकने उनके विरुद्ध अपनी सेना भेजी तो उन्होंने अपने मौलानाज़ादा शेख बाछकको शाहको सन्तुष्ट करनेके लिए भेजा था। इस प्रकार स्पष्ट है कि खानजहाँ अहमद अयाज़के मौलानाज़ादा शेख़ बाछक और खानजहाँ मक़बूल और खानजहाँ जौनाशाहसे संरक्षित चन्दायमके रचयिता मौलाना दाऊद दो भिन्न व्यक्ति थे। इस तथ्यसे परिचित हो जानेपर मैंने इस बातकी चर्चा दूत ग्रन्थमें परिचयके प्रसंगमें जान बूझकर नहीं किया। किन्तु अब इसका उल्लेख इसलिए आवश्यक हो गया कि चन्दायमके आगरा संस्करणकी प्रस्तावनामें विश्वनाथ प्रसादने वही भूल की है जो मैंने की थी अर्थात् उन्होंने तवारीख़-ए- मुबारकशाहीके उक्त कथनको अपने शब्दोंमें उपस्थित कर दिया है जिससे नये तथ्यके प्रकाशमें आनेका भ्रम होता है। दाऊदके मौलाना होनेका प्रमाण मैंने परिचय देते समय कई सूत्रोंसे दिया है। उस समय मेरा ध्यान इस बातकी ओर नहीं गया था कि अख़बार-उल-अख्यारके लेखक शेख़ अब्दुलहक़ने भी उन्हें मौलाना कहा है। साथ ही उन्होंने दाऊदके शेख़ जैनुद्दीनके शिष्य होने और चन्दायममें जैनुद्दीनकी प्रशंसा किये जानेकी बात भी लिखी है जिससे चन्दायमकी पवित्रताका समर्थन होता है। अख़बार-उल-अख्यारकी ये पंक्तियाँ हैं—शेख़ जैनुद्दीन ख्वाहरजादा व खादिमे खास शेख नसीरुद्दीन चिरागे देहली अस्त। जिन्दःरू दर मजलिस व मल्फूजाते शेख हुस्न याफ़्ता अस्त। मौलाना दाऊद व मुसन्निफे चन्दायम मुरीदे ओस्त व मद्हे ब हर बाबये चन्दायम करदा अस्त। (शेख़ जैनुद्दीन चिरागे देहली शेख़ नसीरुद्दीन महमूदके बहनके बेटे और खादिमे खास थे। शेख (नसीरुद्दीन) उनका ज़िक्र धर्मसभाओं तथा सामान्य बातचीतोंमें प्रायः किया करते थे। चन्दायमके रचयिता मौलाना दाऊद उनके भक्त (मुरीद) थे और उन्होंने चन्दायमके प्रारम्भमें उनकी प्रशंसा की है)।