चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 58, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें४१ कथा-वस्तु चन्दायनमें कथाका आरम्भ १८वें कड़वकसे होता है। उसकी कथा इस प्रकार है — १—गोबर महरका स्थान था। (यह सूचना देकर कविने गोबरके अमराइयों, सरोवर, मन्दिर, खोंट बुंग, नगर निवासिया, सैनिकों, बाजार-हाट, बाजीगरों, राज दरबार और महल आदिका वर्णन किया है।) (१८ ३१) २—राव महर के चौरासी रानियाँ थीं। उनमें फूलरानी पट्टमहादेवि (प्रधान रानी) थीं। (३२) ३—सहदेव (राव महर)के घर चाँदने जन्म लिया। धूमधामसे उसकी छठी मनायी गयी। बारहवें महीने महरकी बेटीकी प्रशंसा क्षार-समुद्र भाभार, गुजरात, तिरहुत, अवध और बदायूँ तक फैल गयी और राजाके पास चाँदसे विवाह करनेके संदेश आने लगे। जब चाँद चार बरसकी हुई तो बींत (अथवा जेठ) ने नाइ-ब्राह्मण डुलाकर अपने बेटे बावनसे चाँदका विवाह कर देनका सन्देश सहदेवके पास भेजा। उन्होंने जाकर सहदेवको यह सम्बन्ध स्वीकार करनेको समझाया और सहदेवने विवाह करना स्वीकार कर लिया। बारात आयी बावनके साथ चाँदका विवाह हो गया और दान दहेज देकर लोग चले गये। (३३ ४४) ४—विवाहको हुए बारह बर्ष बीत गये। चाँद पूर्ण यौबना हो गयी पर उसका पति छोटा होने कारण कभी उसकी शैय्यापर सोने नहीं आया। इससे वह शोकाकुल रहने लगी। उसकी काम व्यथाके विलापको उसकी ननदने सुना और जाकर अपनी माँसे कहा। यह सुनकर महरि (चाँदकी सास) दौड़ी हुई उसके पास आयी और उसे समझाने लगी। चाँदने सासकी बातोका उत्तर दिया। सासने क्रुद्ध होकर तत्काल मैके भेज देनेकी बात कही। अब चाँदको उस घरमे रहना दूभर लगने लगा। उसने ब्राह्मण बुलाकर अपने पिताके पास कहलाया कि भाईको पालकी कहारके साथ भेजकर मुझे शीघ्र बुला लें। ब्राह्मणने आकर चाँदकी बात महरसे कही और महरने तत्काल आदमीको भेजकर उसे बुला लिया। (४५-५१) ५—चाँद मैके लौट आयी। लोगोंने उसे महण धुलाकर उसका शृङ्गार किया। सखी-सहेलियाँ उसे देखने आयीं। वे हँसती हुई चाँदको बाहर लिवा ले गयीं और चौरहरपर ले जाकर उससे पति-सहवासके सुख-भोगकी बातें पूछने लगीं। चाँदने उन्हें अपनी काम-व्यथा कह सुनायी। (यह सम्भवतः बारहमासाके रूपमें व्यक्त किया गया है, पर वह केवल संक्षिप्त रूपमें ही प्राप्त है।) (५२-६६) ६—कहींसे गोबरमे एक बाजिर (मजहबी साधू) आया और वह गाता और भीख माँगता नगरमे घूमनेमे लगा। एक दिन चाँद अपने चौरहरपर खड़ी होकर झरोखे से झाँक रही थी कि उस बाजिरने अपना सिर ऊपर उठाया और चाँदको झरोखेपर देखते ही वह मूर्च्छित हो गया। लोग उसके चारों ओर जमा हो गये और उसके मुँहपर